
रामनगर। प्रदेश में आई आपदा को भाजपा राजनीतिक हथियार के रूप में इस्तेमाल करेगी। रामनगर में चल रही प्रदेश कार्यसमिति की बैठक में पहले दिन पारित राजनीतिक प्रस्ताव में भाजपा का पूरा फोकस राज्य में आई आपदा के बाद सरकार की बदइंतजामी पर रहा। ढिकुली के वुड कैशल रिसोर्ट में शनिवार को प्रदेश कार्यसमिति बैठक का विधिवत शुभारंभ हुआ।
राजनीतिक प्रस्ताव के संबंध में अजय भट्ट ने मीडिया को बताया कि आपदा के 67 दिन बाद भी उत्तराखंड के लोग इससे उबर नहीं पाए हैं। आपदा में भारी तबाही और जानमाल का नुकसान हुआ है। जबकि सरकार संवेदनहीन बनी बैठी है। प्रभावित क्षेत्रों में राशन एवं आवश्यक वस्तुओं का भयंकर संकट है। भट्ट का आरोप है कि सरकार की अनदेखी से व्यवस्थाएं पूरी तरीके से फेल हैं। प्रदेश सरकार का केंद्र से और नौकरशाहों से तालमेल नहीं है जिसके चलते बचाव कार्य में देरी हुई। कुछ नौकरशाहाें ने तो सरकार के आदेश मानने से इंकार कर दिया।
उन्होंने बताया कि पूरे देश ने आपदा के बाद भरपूर सहयोग दिया और राहत सामग्री भेजी लेकिन सरकार ने उसे भी रिसीव नहीं किया जिससे बड़ी मात्रा में राहत सामग्री खराब हुई। सरकार अपनी छवि बनाने में जुटी रही और 75 करोड़ खर्च कर डाले। उन्होंने बताया कि मुख्य सचिव के हाल के बयान से साफ है कि आपदा राहत के नाम पर करोड़ों रुपये की धांधली हुई है। सरकार ने जो राहत किट 620 रुपये में खरीदी बाजार में उसकी किमत 480 रुपये है। मुख्यमंत्री ने खुद ही राहत किट की कीमत तय की थी जिसका उन्हें अधिकार नहीं है।
उनका कहना है कि सरकार आपदा पीड़ित किसानों के प्रति भी लापरवाह है और शोषण कर रही है। सरकार ने आलू का समर्थन मूल्य 10 रुपये और सेब का 20 रुपये घोषित किया है। केंद्र सरकार ने भी उत्तराखंड के लिए घोषित एक हजार करोड़ की राशि में सिर्फ 250 करोड़ ही रिलीज किए हैं।
भट्ट का कहना है कि मुख्यमंत्री के बयान से उत्तराखंड का पर्यटन उद्योग पूरी तरह चौपट हो गया है और अर्थव्यवस्था चरमरा गई है। उत्तराखंड के तमाम इलाके ऐसे हैं जहां अभी भी पर्यटक आसानी से जा सकते हैं।
भाजपा ने राजनीतिक प्रस्ताव में कहा है कि सरकार देश की सुरक्षा को लेकर गंभीर नहीं है। टुंडा को उत्तराखंड से ही पकड़ा गया और चीन हमारी सीमाओं तक आसानी से दस्तक दे रहा है। उत्तराखंड के सीमांत जिले अभी भी पूरी तरीके से कटे हुए हैं जबकि तत्काल उन्हें सड़क मार्ग से जोड़ा जाना चाहिए था। भट्ट का कहना है कि प्रदेश की कानून व्यवस्था भी बदहाल है। हत्या के एक मामले में प्रदेश के एक मंत्री का नाम भी आ रहा है इसकी सीबीआई जांच होनी चाहिए।
राज्य सरकार ने तीन दिन रुद्रप्रयाग जिले को जिलाधिकारी रहित रखा। इतना ही नहीं भारतीय पुरातत्व विभाग की टीम चार दिन तक उत्तराखंड में घूमती रही, लेकिन उन्हें केदारनाथ जाने के लिए हेलीकॉप्टर नहीं दिया गया, जबकि टीम की रिपोर्ट के आधार पर ही यहां नवनिर्माण के साथ ही सफाई अभियान चलना था। गुजरात से आई विशेष टीम आपदाग्रस्त क्षेत्रों में कार्य करने आई थी लेकिन उसे लौटा दिया गया।
इंजीनियरिंग प्रोजेक्ट इंडिया लि. कंपनी जो पूर्व में ब्लैक लिस्टेड थी उसे मलबा हटाने का ठेका तो दे दिया गया लेकिन उसने आज तक कार्य प्रारंभ नहीं किया।
कार्यसमिति में नेता प्रतिपक्ष अजय भट्ट के अलावा, भाजपा प्रदेश प्रभारी राधामोहन सिंह, प्रदेश अध्यक्ष तीरथ सिंह रावत, पूर्व मुख्यमंत्री भुवन चंद खंडूरी, राष्ट्रीय सचिव त्रिवेंद्र सिंह रावत आदि मौजूद थे।
