
लंदन: गर्भपात संबंधी नया कानून पारित होने के बाद उसके तहत आयरलैंड में पहला जीवनरक्षक गर्भपात किया गया। पिछले वर्ष आयरलैंड के एक अस्पताल द्वारा गर्भपात से इनकार करने के बाद भारतीय दंत-चिकित्सक सविता हलप्पानवार की मौत हो गई थी। इस घटना के बाद देश में नया कानून बना है।
देश में कानूनी तौर पर वैध पहला गर्भपात एक महिला का किया गया जिनके जीवन को उनके 18 सप्ताह के गर्भ से खतरा था। यह मामता 31 वर्षीय सविता के मामले जैसा ही था। दोनों मामलों में गर्भ की झिल्ली टूट गई थी और सेपसिस होने के लक्षण उभरने लगे थे।
लेकिन सविता से उलट इस मामले में महिला का गर्भपात किया गया और नेशनल मैटरनिटी अस्पताल में भर्ती मरीज की हालत में काफी सुधार है।
आयरलैंड की संसद के दोनों सदनों ने पिछले ही महीने ‘प्रोटेक्शन ऑफ लाइफ ड्यूरिंग प्रेगनेंसी एक्ट’ पारित किया था। देश का पहला कानूनी गर्भपात नए अधिनियम की धारा सात के तहत किया गया है।
इस प्रावधान के तहत शारीरिक बीमारी के कारण महिला की जान को खतरा होने की स्थिति में गर्भपात की अनुमति दी गई है। नए कानून के तहत आयरलैंड मेडिकल काउंसिल में पंजीकृत डॉक्टर ही गर्भपात करा सकते हैं । इसके अलावा यह बताना भी आवश्यक है कि कानून के किस प्रावधान के तहत महिला का गर्भपात किया गया है। स्वास्थ्य मंत्रालय को प्रतिवर्ष एक रिपोर्ट प्रकाशित करना होगा कि कितने गर्भपात हुए हैं और वे किन प्रावधानों के तहत किए गए हैं।
