
अमृतसर: अवैध कालोनियों की अप्रूवल के लिए पंजाब सरकार की तरफ से जारी किए गए नए नोटीफिकेशन में एक बार फिर से आम जनता को ही पिसना होगा। पंजाब सरकार ने एक बार फिर से आम शहरियों को इस कानून के तहत कोई बड़ी राहत नहीं दी है जिससे एक बार फिर से शहरी इलाकों में रहने वाले लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ेगा।
हालांकि पहले नोटीफिकेशन की तुलना में सरकार ने अप्रूवल फीस में भारी कटौती तो की है लेकिन इस बार गधे व घोड़े को एक अस्तबल में बांधने की बजाय अलग-अलग स्लैब बना दिए हैं जिसमें 1 से 50 गज तक अलग फीस, 50 से 100 गज, 100 से 250 गज व 250 से 500 गज व अन्य प्लाटों व मकानों के लिए अलग-अलग फीस तय कर दी है जिसको नहीं भरने पर बिजली, सीवरेज व पानी का कनैक्शन काट दिया जाएगा।
हालांकि इस बार भी नोटीफिकेशन में सरकार ने यही कहा है कि यह कानून अवैध कालोनियों को रैगुलर करने के लिए जारी किया गया है लेकिन जिस प्रकार से सरकार ने इसमें लोगों को डंडा भी दिखाया है कि यदि लोग अपने मकानों व प्लाटों की एन.ओ.सी. नहीं लेते हैं तो बिजली काट दी जाएगी वह एक तरह से अमानवीय व्यवहार है और इस प्रकार का सलूक आज तक देखने को नहीं मिला है।
इस बार यह भी प्रावधान है कि जिन लोगों के मकानों के नक्शे पास हैं उनसे दोबारा फीस नहीं ली जाएगी और जिन इलाकों की जमीन में 2 हजार से कम कलैक्टर रेट है वहां 50 से 100 गज तक के मकानों व प्लाटों में कोई फीस नहीं ली जाएगी लेकिन खुद वसीका नवीस यूनियन का भी कहना है कि इसमें बहुत ही कम लोगों को सरकारी लाभ मिलेगा क्योंकि महंगाई के युग में अमृतसर में बहुत कम ऐसे इलाके हैं जहां सरकारी कलैक्टर रेट 2 हजार रुपए से कम है।
इतना ही नहीं सरकार की तरफ से जारी नोटीफिकेशन के बारे में खुद संबंधित अधिकारियों को भी पूरी जानकारी नहीं है कि क्या करना है और अधिकारी भी इस मामले में हाईकमान के साथ विचार-विमर्श कर रहे हैं। फिलहाल नया नोटीफिकेशन भी शहरी जनता को कोई बड़ी राहत देने वाला नहीं है क्योंकि हर व्यक्ति को जो नगर निगम की हद में रहता है उसे अपने मकानों व प्लाटों के लिए फीस भरनी ही होगी। इस संबंध में प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि लोगों की सुविधा के लिए सभी सुविधा केन्द्रों में एन.ओ.सी. के लिए अलग काऊंटर खोले जा रहे हैं और कैंपों के जरिए भी लोगों के आवेदन लिए जाएंगे।
कहां है आम आदमी का नेता: ऐसे में आम आदमी का नेता बनकर वोट बटोरने वाले नेता के बारे में अक्सर लोग चर्चा करते हैं कि आखिरकार आम आदमी के नेता को क्या हो गया है जो शहरी जनता के हितों की बात करता था और शहरियों के हक दिलाने के लिए धरनों पर भी बैठ जाता था? आम आदमी का नेता कहां चला गया है।
