
ऊना। जिला में 78.64 करोड़ रुपये की लागत की 39 सिंचाई योजनाओं का कार्य प्रगति पर है जिनके पूर्ण होने पर लगभग 3538 हेक्टेयर कृषि योग्य भूमि को सिंचाई की सुविधा उपलब्ध हो जाएगी। जिला में 499 सिंचाई योजनाओं का निर्माण कार्य पूर्ण कर 20184 हेक्टेयर भूमि को सिंचाई की सुविधा प्रदान करवा दी गई है। यह जानकारी उपायुक्त अभिषेक जैन की अध्यक्षता में आयोजित एक कार्यक्रम में आईपीएच विभाग के अधीक्षण अभियंता त्रिवेदी ने दी। कार्यक्रम में विभाग के तीनों अधिशाषी अभियंता एनएम सैणी, मुकेश हीरा एवं हरेंद्र भारद्वाज और डीपीआरओ गुरमीत बेदी भी उपस्थित थे।
त्रिवेदी ने बताया कि दौलतपुर पुल से गगरेट पुल तक स्वां नदी के दोनों किनारों तथा दौलतपुर पुल से संतोषगढ़ पुल तक स्वां नदी में मिलने वाली सभी 73 खड्डों में तटबांध लगाने का प्रावधान है तथा इस परियोजना को स्वां तटीयकरण फेस-4 का नाम दिया गया है। इस योजना की अनुमानित लागत 922.48 करोड़ रुपये है।
उन्होंने बताया कि जिला के दुर्भाग्य के रूप में जानी जाने वाली स्वां नदी के बाढ़ नियंत्रण कार्य के प्रथम तथा द्वितीय चरण को पूर्ण कर लिया गया है जिससे 5 हजार हेक्टेयर भूमि को कृषि योग्य बनाया गया है। अब संतोषगढ़ पुल से नीचे पंजाब सीमा तक के तटीयकरण को 48.59 करोड़ रुपये की प्राप्त कर एक किलो मीटर का काम पूरा कर लिया गया है। इससे 477.50 हेक्टेयर भूमि को कृषि योग्य बनाया जा सकेगा। चालू वित्त वर्ष में बाढ़ नियंत्रण कार्यों के तहत 254 हेक्टेयर भूमि को कृषि योग्य बनाने का लक्ष्य रखा गया है।
उन्होंने बताया कि त्वरित सिंचाई लाभ योजना के अंतर्गत 42 लघु सिंचाई योजनाओं की एक शेल्फ तैयार करके उच्च कार्यालय को स्वीकृति हेतु भेजी गई है। इसकी स्वीकृति उपरांत लगभग 2100 हेक्टेयर भूमि को सिंचाई की सुविधा उपलब्ध करवाई जा सकेगी। ऊना शहर में 11.16 करोड़ की मल निकासी योजना का कार्य पूर्ण कर लिया गया है। संतोषगढ़ एवं मैहतपुर की मल निकासी योजना का कार्य प्रगति पर है। इसके अतिरिक्त, गगरेट विस क्षेत्र की गगरेट मल निकासी योजना की स्वीकृति 13.69 करोड़ रुपये प्राप्त कर लिए गए हैं तथा सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट के निर्माण हेतु को भूमि को चिन्हित करने की प्रक्रिया प्रगति पर है।
