पिछले साल टूटे मकानों का भी ले लिया मुआवजा

बड़कोट(उत्तरकाशी)। दो सालों से आपदा की मार झेल रहे खरादी में राहत वितरण में बड़ा खेल हो रहा है। बीते साल अगस्त की आपदा में अपने आशियाने गवां चुके 13 प्रभावितों ने बीते साल भी दो -दो लाख रुपये मुआवजा लिया और इस बार दोबारा उन्हीं भवनों के एवज में दो- दो लाख रुपये की सहायता ली ली। इसका खुलासा तब हुआ जब इसी तरह दोबारा राहत सहायता नहीं मिलने पर शेष 25 परिवारों ने विरोध किया और पोल खोल दी।
पिछले साल अगस्त में यमुना नदी में आयी बाढ़ ने खरादी कस्बे को तहस-नहस कर दिया था। तब प्रशासन ने यहां 38 भवनों को पूर्ण क्षतिग्रस्त दिखाकर प्रभावितों को मानक के अनुसार दो -दो लाख रुपये की सहायता बांटी। इस बार जून में भी खरादी पर आपदा का कहर बरपा।
स्थानीय पटवारी ने अपनी रिपोर्ट में चार भवन पूरी तरह क्षतिग्रस्त होने की रिपोर्ट दी। प्रशासन ने प्रभावितों की ही एक कमेटी बनायी और उसकी संस्तुति पर 13 परिवारों को पूर्ण क्षतिग्रस्त भवन के एवज में दो -दो लाख रुपये मुआवजा बांट दिया जबकि ये 13 परिवार बीते साल मुआवजा पा चुके 38 प्रभावितों में शामिल थे।
शेष 25 परिवार भी अब 13 प्रभावितों की तर्ज पर दो-दो लाख का मुआवजा देने की मांग कर रहे हैं। इस हाल में 13 परिवारों को दोबारा मुआवजा बांटा जाना तहसील प्रशासन के गले की हड्डी बनता जा रहा है।

उन्हें दोबारा दिया तो हमें भी दो

उत्तरकाशी। खनेड़ा के प्रधान किताब सिंह, स्यालना के प्यारेलाल, गोपाल चौहान, दयाराम, भगत सिंह आदि ने कहा कि खरादी में राहत वितरण में दोहरे मानक अपनाए गए हैं। यदि सभी प्रभावितों को राहत सहायता नहीं दी गई तो वे 23 अगस्त से तहसील मुख्यालय पर क्रमिक अनशन तथा 26 से आमरण अनशन शुरू करेंगे। उन्होंने वैकल्पिक मार्ग के लिए तोड़े गए अन्य 13 भवन स्वामियों को भी मानक के अनुसार मुआवजा देने की मांग की है।

शासन के निर्देशानुसार बीते साल खतरे की जद में आए भवनों को भी पूर्ण क्षतिग्रस्त मानकर राहत सहायता दी गई थी। ये 13 मकान उसी श्रेणी में थे। प्रभावितों की कमेटी की संस्तुति पर ही इन्हें दोबारा मुआवजा दिया गया।
देवमूर्ति यादव, एसडीएम बड़कोट।

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