भाई का मुंह तक मीठा नहीं करा पाई बहन

उत्तरकाशी/नौगांव। राखी बांध कर बहनों ने अपने भाई की लंबी उम्र की कामना तो की लेकिन आपदा के चलते बेबसी का आलम देखिए इस बार बहनें भाई का मुंह मनचाही मिठाई से मीठा करने को भी तरस गई। वजह, रास्ते खराब होने के कारण इस बार उत्तरकाशी में रक्षा बंधन पर दूध नही नहीं पहुंच पया। फलस्वरूप मिठाईयां नहीं बन सकीं। ऐसे में कहीं बताशों से तो कही चीनी से ही भाईयों का मुंह मिठा कराया गया। रेडीमेड मिठाईयां भी कुछेक लोगों के लिए विकल्प बनी। हाईवे बंद होने से अन्य जरूरी सामान का भी संकट गहरा गया है।
नालूपाणी में अवरुद्ध गंगोत्री हाईवे पर नौवे दिन भी यातायात बहाल नहीं हो पाया। ऐसे में सप्लाई चेन बाधित होने से जिला मुख्यालय क्षेत्र में सब्जी, दूध, ईंधन आदि जरूरी सामान की किल्लत गहरा गई है।
बारिश नहीं होने के बाद भी नालूपाणी में हाईवे पर यातायात बहाल नहीं हो पाया। यहां बीते नौ दिनों से राजमार्ग अवरुद्ध है जबकि भटवाड़ी, गंगोत्री की ओर तो हाईवे 16 जून से ही बंद पड़ा है। ऋषिकेश, देहरादून की ओर से आने वाला जरूरत का सामान जिला मुख्यालय तक ही नहीं पहुंच पा रहा है। ऐसे में भटवाड़ी आदि क्षेत्रों की स्थिति समझी जा सकती है। उत्तरकाशी नगर के इकलौते पेट्रोल पंप पर दो दिन पहले डीजल-पेट्रोल खत्म हो गया था। वहां अब ताले लटके हैं। सब्जी मंडी वीरान पड़ी है। दूध की आपूर्ति न होने से मिठाई का कारोबार भी चौपट हो गया है।
उधर, बर्नीगाड के पास पहाड़ी से भारी बोल्डर और मलबा आने से यमुनोत्री राजमार्ग अवरुद्ध हो गया। यहां दोनों ओर वाहनों की लंबी कतार लग गई। दो घंटे की मशक्कत के बाद जैसे-तैसे यातायात बहाल हो पाया। नौगांव बाजार में राजमार्ग पर जमा मलबा परेशानी का सबब बना हुआ है। सूचना देने पर भी एनएच के अधिकारियों की ओर से कोई कार्रवाई न किए जाने से जनता में रोष व्याप्त है।

नौ दिनों से देहरादून से दूध की आपूर्ति ठप पड़ी हुई है। बुग्याल क्षेत्रों से गूर्जर भी दूध और मावे की पर्याप्त आपूर्ति नहीं कर पा रहे हैं। ऐसे में इस बार रक्षाबंधन पर मिठाईयां नहीं बन पाई। बीते सालों में रक्षाबंधन के आसपास जहां डेढ़ से दो लाख का कारोबार हो जाता था, वह इस बार कुछ हजारों में ही सिमट गया।
किशोर भट्ट, मिठाई विक्रेता उत्तरकाशी।

भैया को दूध और मावे से बनी मिठाई बहुत पसंद है। हर बार रक्षाबंधन पर उन्हें यही मिठाई खिलाती थी। इस बार मिठाई की दुकानों पर मिठाईयां मिली ही नहीं। ऐसे में रेडीमेड डिब्बा बंद मिठाई से ही काम चलाना पड़ा।

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