
मैहतपुर (ऊना)। ग्राम पंचायत देहलां की एक बस्ती में मंगलवार को डायरिया फैलने पर आईपीएच विभाग के अधिकारियों ने गांव में प्रदूषित पेयजल सप्लाई होने से इनकार किया है। उनका कहना है कि डायरिया जैसी बीमारी होने के लक्षण की वजह कुछ और हो सकती है। आईपीएच उपमंडल मैहतपुर में तैनात एसडीओ पीके चड्ढा ने बुधवार को बताया कि वाटर स्टोरेज टैंक की नियमित सफाई की जाती है, और आवश्यकतानुसार क्लोरीनिंग की जाती है। लिहाजा आईपीएच विभाग की ओर से प्रदूषित पेयजल सप्लाई होने की आशंकाओं को उन्होंने खारिज कर दिया है। हालांकि उन्होंने माना कि जो लोग निजी वाटर टैंकों में पानी जमा रखते हैं, पेयजल के लिए उसका प्रयोग होने से ऐसी बीमारी की संभावनाएं हो सकती हैं। देहलां के सरकारी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में तैनात डा. सुरेश शर्मा ने कहा कि दस्त तथा उल्टियां होने की शिकायत लेकर आने वाले मरीजों का तुरंत उपचार होने से बीमारी पर जल्द ही काबू पा लिया गया, जिससे बीमारी को फैलने से रोक लिया गया है। पिछले कुछ दिनों से जो भी मरीज उनके पास उपचार को आए, उनमें इस तरह के लक्षण पाए जाने से लोगों में घबराहट फैल गई, लेकिन स्थिति अब पूरी तरह से काबू में है। हालांकि बहुत से मरीज अब भी निजी अस्पतालों में उपचार को जा रहे हैं। चड्ढ़ा ने बताया कि निजी कुंओं, बाबड़ियों में भी क्लोरीन के पैकेट डालने को कहा गया है और प्रत्येक पेयजल सप्लाई स्कीमों को साफ और क्लोरीनयुक्त पेयजल सप्लाई करने की हिदायतें जारी की जा रही हैं।
