न डाक्टर, न सुविधाएं नाम का अस्पताल

कर्णप्रयाग। उत्तराखंड राज्य निर्माण के तेरह वर्षों में भी पहाड़ में स्वास्थ्य सेवाएं पटरी पर नहीं आ सकी। विशेषज्ञ डाक्टर तो दूर फार्मेसिस्ट, पैरामेडिकल स्टाफ भी सरकारी अस्पतालों में पर्याप्त नहीं है। चमोली में जिला चिकित्सालय सहित पांच सीएचसी व अन्य सरकारी अस्पतालों में स्वीकृत चिकित्सकों के 141 पदों के सापेक्ष 93 पद रिक्त चल रहे हैं। पैरामेडिकल स्टाफ की कमी से भी स्थिति दयनीय बनी है। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र थराली में सिर्फ दो चिकित्सक ही तैनात हैं।
जनपद चमोली में स्वास्थ्य सेवाएं निरंतर बदहाल होती जा रही हैं। मुख्य केंद्रों पर ही स्थिति भगवान भरोसे है। ऐसे में ग्रामीण क्षेत्रों के बारे में स्वयं समझा जा सकता है। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र कर्णप्रयाग, गैरसैंण, पोखरी, जोशीमठ में स्वीकृत स्टाफ के सापेक्ष बीस से तीस प्रतिशत चिकित्सक कार्यरत हैं। सबसे बुरी स्थिति थराली में है, जहां चिकित्सकों के स्वीकृत नौ पदों के सापेक्ष सिर्फ दो डाक्टर कार्यरत हैं। चिकित्सक और सुविधाओं के अभाव में ये उक्त शोपीस बनते जा रहे हैं। कुछ को छोड़ दें तो इन केंद्रों से 85 फीसदी से अधिक मामले सीधे तौर पर हायर सेंटर रेफर किए जाते हैं।
ग्रामीण क्षेत्रों में हाल बुरे
कर्णप्रयाग, गैरसैंण और थराली सीएचसी के अधीन 23 अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र फार्मेसिस्टों के सहारे हैं। कर्णप्रयाग में 8 परिवार कल्याण केंद्रों में तो फार्मेसिस्ट का पद भी खाली पड़ा है।
अपने भवन नहीं
स्वास्थ्य केंद्र/परिवार कल्याण केंद्र जस्यारा (कर्णप्रयाग), मालसी, सैंजी व मेहलचौरी (गैरसैंण), केई पैंटी, लोल्टी, चिडिंगा तथा पेनगढ़ (थराली) के पास अपने भवन नहीं हैं।
शुरू नहीं हुआ ट्रामा सेंटर
कर्णप्रयाग में 84 लाख की लागत से करीब पांच साल में बनकर तैयार हुए ट्रामा सेंटर को इस वर्ष यात्रा से पहले शुरू करने की बात कही गई। लेकिन इसका संचालन नहीं हो पाया है। सीएमओ के निर्देश पर भले ही यहां एक्सरे मशीन लगा दी गई है।
मोरचरी भी नहीं हुई हैंडओवर
कर्णप्रयाग, जोशीमठ में वर्ष 2010 में तैयार मोरचरी बनकर तैयार हो चुकी हैं। लेकिन इन्हें सीएसची को हैंडओवर नहीं किया गया है। दुर्घटना में घायल अन्य कारणों से अस्पताल में उपचार के दौरान मरीज की मृत्यु होने पर शव खुले में रखा जाता है, जिससे अन्य मरीज व तीमारदार भी परेशान होते हैं।
कोट
जनपद में चिकित्सकों के 93 पद रिक्त हैं। तीन डाक्टरों के ट्रांसफर आर्डर आ चुके हैं। पैरामेडिकल स्टाफ की कमी से भी मुश्किल हो रही है। सीएचसी थराली की स्थिति नाजुक बनी है। समस्याओं से शासन को अवगत करा दिया गया है। – डा. अजीत गैरोला, सीएमओ चमोली (गोपेश्वर)

Related posts