
शिमला। मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने सोमवार नई दिल्ली में कॉनकॉर की कारपोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व एवं निरंतरता परियोजना शुरू की। सीएम ने कहा कि हिमाचल के शिमला, कुुल्लू और किन्नौर जिलों में सेब के सतत विकास की इस परियोजना के तहत जल संग्रहण, यांत्रिकीकरण और कृषि शिक्षा के माध्यम से सेब के बगीचों की उत्पादकता तथा सेब की गुणवत्ता में सुधार के लिए जरूरी नीति अपनाई जाएगी। परियोजना के तहत बागवानों के प्रशिक्षण और क्षमता विकास पर बल दिया जाएगा।
वीरभद्र सिंह ने कहा कि यह प्रोजेक्ट नोबेल पुरस्कार विजेता डा. आरके पचौरी के नेतृत्व में दी एनर्जी एवं रिसोर्सेज इंस्टीच्यूट (टेरी) के माध्यम से कार्यान्वित किया जाएगा। इस परियोजना से प्रत्यक्ष तौर पर 1500 बागवान तथा अप्रत्यक्ष तौर पर 1000 बागवान लाभान्वित होंगे। हिमाचल के लगभग 1.70 लाख कृषक परिवारों की आय की आजीविका मुख्य रूप से सेब पर निर्भर है। हिमाचल के 12 जिलों में से 6 जिलों में व्यावसायिक तौर पर सेब का उत्पादन किया जा रहा है। राज्य में देश की उपज का लगभग 38 प्रतिशत सेब उत्पादित किया जाता है। वीरभद्र सिंह ने कहा कि गत 55 वर्षों में हिमाचल में बागवानी विकास की दिशा में सकारात्मक बदलाव आया है। हिमाचल में सेब की फ सल के अधीन वर्ष 1960-61 में 3025 हेक्टेयर क्षेत्र था। यह वर्ष 2011-12 में बढ़कर 1.04 लाख हेक्टेयर हो गया। हालांकि, हिमाचल मेें सेब की उत्पादकता प्रति हेक्टेयर 6 से 11.5 मीट्रिक टन है, जबकि विकसित देशों में यह प्रति हेक्टेयर 35 से 40 मीट्रिक टन है। इस अवसर पर वीरभद्र सिंह ने हिमाचल के सेब बागवानों के व्यापक हित में इस परियोजना को कार्यान्वित करने के लिए टेरी और कॉनकॉर का आभार व्यक्त किया।
