
मंडी। जिले में इस बार भारी बारिश कहर बन कर बरसी। बादल फटने की घटनाओं ने जहां तबाही मचाई, वहीं जिले के पांच गांव भूस्खलन की चपेट में आ गए हैं। मकानों और जमीन में बड़ी-बड़ी दरारें पड़ने के कारण ग्रामीण खतरे के साए में जीने को मजबूर हैं। भूस्खलन से करोड़ों का नुकसान हो चुका है। कई परिवार बेघर होने के साथ अपनी जीवन भर की कमाई से जुटाई संपत्ति को गंवा चुके हैं।
जिले के धर्मपुर विधानसभा क्षेत्र की भरौरी पंचायत के सतरेहड़, मठी बनवार, जंगेल, जोगिंद्रनगर क्षेत्र की नेरघरवासड़ा पंचायत के कुंडनी गांव, द्रंग क्षेत्र की कुन्नू पंचायत के सरी गांव में भूस्खलन से करोड़ों का नुकसान हो चुका है। भरौरी पंचायत के सतरेहड़ और मठी बनवार गांव में करीब आठ परिवारों के मकान भूस्खलन से जमींदोज हो गए। इसी पंचायत के जंगेल में लगातार जमीन धंसने से कई परिवारों पर खतरा मंडरा रहा है।
जोगिंद्रनगर विधानसभा क्षेत्र की नेरघरवासड़ा पंचायत का कुंडनी गांव भी भूस्खलन की चपेट में है। दो दर्जन से अधिक परिवारों के मकानों में दरारें पड़ने से ये गिरने की कगार पर है। द्रंग विधानसभा क्षेत्र की कुन्नू पंचायत के सरी गांव में भारी भूस्खलन से करीब आधा दर्जन परिवार बेघर हो गए। उक्त गांवों में भूस्खलन का खतरा कम नहीं हुआ है। लोग अभी भी खतरे के साए में रहने को मजबूर हैं। प्रदेश में प्राकृतिक आपदा से हुए नुकसान का जायजा लेने आई केंद्रीय टीम भी सतरेहड़ व मठी बनवार गांव का दौरा कर चुकी है। प्रशासन ने भी दोनों गांवों में भूस्खलन से करीब साढ़े चार करोड़ की रिपोर्ट सरकार को भेजी है।
एसडीएम से मांगी है रिपोर्ट : गोपाल
कार्यकारी उपायुक्त गोपाल चंद का कहना है कि जिन गांवों में भूस्खलन से नुकसान हुआ है और खतरा बना है, एसडीएम से रिपोर्ट मांगी गई है। ज्यूलॉजिकल विभाग के विशेषज्ञों से उक्त गांवों में भूस्खलन के कारणों का अध्ययन करने के लिए कहा जाएगा। भारी बारिश के कारण लैंड स्लाइडिंग की घटनाएं हो रही हैं। जिले में अब तक बारिश से करीब 126 करोड़ का नुकसान हो चुका है।
