
देश की सीमा पर लड़ने वाले सेना के अफसरों को देहरादून में बिल्डरों के खिलाफ लड़ाई लड़नी पड़ रही है। और जब वे इसकी शिकायत करने नगर निगम के मुख्य नगर अधिकारी के पास पहुंचे तो अधिकारी ने उनका मजाक उड़ाया गया।
इन बुजूर्गों को नगर निगम से लेकर जिला प्रशासन और एमडीडीए कार्यालयों में धक्के खाने पड़ रहे हैं। इसके बावजूद उनकी पीड़ा सुनने के बजाए उनका मजाक उड़ाया जा रहा है। सरकारी मशीनरी की इस कार्य शैली से सेना के रिटायर अफसर आहत हैं।
बिल्डर ने पूरी सड़क खोद दी
जाखन में कोचर कॉलोनी के पास अफसर कॉलोनी की एक बिल्डर ने पूरी सड़क खोद दी है। वह कॉलोनी की पेयजल लाइन के ऊपर से सीवरेज लाइन ले जाने की तैयारी में है, जबकि रेजीडेंट वेलफेयर सोसाइटी के पदाधिकारी इसका विरोध कर रहे हैं। ये पदाधिकारी सेना के भूतपूर्व अफसर हैं।
सोमवार को ये लोग एमडीडीए में अवर अभियंता के पास शिकायत करने पहुंचे, लेकिन अवर अभियंता ने कुछ सुनने से इनकार कर दिया। इससे पहले ये लोग नगर निगम के मुख्य नगर अधिकारी के पास पहुंचे हुए थे, लेकिन उन्होंने भी समस्या सुनने के बजाय सेना के भूतपूर्व अफसरों पर ही कटाक्ष किया। कहा कि ‘सीमा पर सेना के पांच जवान सिर कटाकर क्यों आ गए। पाकिस्तानी सेनाओं के सिर काट कर क्यों नहीं आए’।
एसोसिएशन के सचिव और सेवानिवृत्त ब्रिगेडियर रमेश भाटिया ने बताया कि मुख्य नगर अधिकारी के बेतुके सवाल से मैं बेहद आहत हुआ हूं। मुझे राष्ट्रपति से पांच बार पुरस्कार मिल चुका है। उन्होंने कहा कि ऐसे अफसरों की ही कार्यशैली से आज सिस्टम में जंग लग रहा है।
दिलाराम स्थित जलसंस्थान के अभियंताओं से भी वह मिले, लेकिन वहां भी बेरुखी झेलनी पड़ी। लगभग एक घंटे के इंतजार के बाद एमडीडीए वीसी के सामने इन लोगों ने पूरी समस्या विस्तार से रखी। इस दौरान एसोसिएशन के अध्यक्ष और पूर्व कर्नल बीएस नेगी, ब्रिगेडियर बीएस बहुखंडी मौजूद थे।
इस मामले को मैं सुन चुका हूं। सचिव एमडीडीए बंशीधर तिवारी को स्थलीय निरीक्षण करने का निर्देश दिया गया है। इसके बाद जो भी उचित होगा, वह कार्रवाई की जाएगी।
