कुदरत ने तोड़ी, राखी की डोर..

कुदरत ने कई बहनों के भाई तो छीने ही अब रह-रह कर याद भी दिला रही है। बहनें भाईयों के बिना मायूस हैं और इधर रक्षाबंधन ने भी दस्तक दे दी।

आपदा ने पहाड़ के रास्ते ही नहीं तोड़े, रिश्तों को जोड़ने वाली डोर की राह भी कमजोर कर दी है। आपदाग्रस्त क्षेत्रों की कई बहनें इस रक्षाबंधन पर मायूस हैं।

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भाई आपदा में लापता
वजह कि बाहर रहने वाले उनके भाई राखी बंधवाने घर नहीं आ पा रहे हैं। दूसरी ओर, कई बहनों के भाई आपदा में लापता हैं। ऐसे में उनके लिए पर्व भाई की यादों के दर्द का सबब बन गया है।

गौचर के पास कमेरा गांव में रहती है प्रतिभा। 25 वर्षीय प्रतिभा घर में छोटी होने के नाते सबकी लाडली है। उसका भाई शैलेश नोएडा में काम करता है।

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रास्ता टूट गया
हर बार प्रतिभा भाई से राखी पर मनपसंद गिफ्ट हासिल करती थी, लेकिन इस बार उसे गिफ्ट नहीं भाई का इंतजार है। दरअसल, कुछ दिन पूर्व बादल फटा तो गांव का पूरा रास्ता बह गया।

अब शैलेश घर नहीं आ पा रहा। प्रतिभा बताती है कि भाई भले ही घर न आ रहे हों, लेकिन उनकी राखी संभालकर रखेगी। रास्ता ठीक होते ही भाई को बुलाकर राखी बांधेगी। हालांकि, रस्म निभाने के लिए वह पर्व पर मौसेरे भाई को राखी बांधने वाली है।

लक्ष्मी, रजनी नहीं मनाएंगी त्योहार
द्यूली ऊखीमठ निवासी सुरेश तिवाड़ी का केदारनाथ में होटल था। आपदा के बाद से उसका कुछ पता नहीं चल रहा है। आराघर व्यापार संघ के अध्यक्ष और सुरेश के चचेरे भाई रामकृष्ण तिवाड़ी बताते हैं कि पांच भाइयों में सुरेश सबसे छोटा था।

उनकी बहनें लक्ष्मी और रजनी ऊखीमठ में ही रहती हैं। रामकृष्ण ने बताया कि हर साल रक्षाबंधन पर सभी भाई लक्ष्मी और रजनी के घर जाते थे, लेकिन इस बार सुरेश नहीं है तो कोई भी पर्व नहीं मनाएगा। बताया कि लक्ष्मी और रजनी को अब भी भाई के सकुशल होने का इंतजार है।

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