
देहरादून के हिमालयन इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज जौलीग्रांट के शल्य चिकित्सा विभाग ने एक अनोखा कारनामा कर दिखाया है। जिसकी बदौलत दो लोगों को नई जिंदगी मिली है।
शल्य चिकित्सा विभाग ने दो हृदय रोगियों की बाईपास सर्जरी में हाथ की नस से ग्राफ्ट लगाया है। विशेषज्ञ चिकित्सकों का दावा है कि उनका जीवन 25 साल तक के लिए सुरक्षित हो गया।
जौलीग्रांट अस्पताल में दिल का दौरा पड़ने पर रुद्रप्रयाग के प्रेमप्रकाश और मुजफ्फरनगर के दिलशाद को भर्ती कराया गया था। दोनों की आपातकालीन स्थिति में बाईपास सर्जरी की गई।
जटिल ऑपरेशन
जटिल ऑपरेशन के लिए विभाग की शल्य चिकित्सक डा. भावना सिंह की अगुवाई में टीम ने आपरेशन पूरा किया। बताया कि दोनों मरीजों की आयु 45 से 50 के आसपास है। अमूमन ऐसी स्थिति में पैर की नस को लेकर हृदय में बाईपास ग्राफ्ट लगाया जाता है, जिसकी लाइफ 10 से 12 साल ही मानी जाती है।
इसमें दोबारा ब्लॉक (रुकावट) होने की आशंका बनी रहती है। डा. भावना सिंह ने मरीजों की हाथ की नस को लेकर बाईपास ग्राफ्ट लगाया है। इस प्रकार के ग्राफ्ट की विशेषता है कि यह 20 से 25 सालों तक बेहतर ढंग से काम करता है। शल्य क्रिया में डा. संजय थपलियाल और डा. सुशील ने भी सहयोग किया।
