राहत के नाम पर सरकारी धन की बंदरबांट

बड़कोट (उत्तरकाशी)। आपदा राहत में बंदरबांट की शिकायतें आपदा के बाद से ही आने लगी थी। बड़कोट तहसील क्षेत्र में आपदा के धन की बंदरबांट की शिकायत सामने आई है। सरकारी आंकड़े ही इसकी तस्दीक कर रहे हैं। बड़कोट में 16-17 जून की आपदा में कम और इसके बाद कई गुना अधिक नुकसान हो गया। यहां आपदा राहत पाने वालों की संख्या दिनोंदिन बढ़ना बड़े घालमेल की ओर इशारा कर रहा है। ईमानदारी से जांच हो तो दूध का दूध और पानी का पानी हो सकता है, लेकिन जब सब मिले हुए हों तो ऐसा होना मुश्किल है।
सरकारी अभिलेखों पर नजर डालें तो 16-17 जून को आई आपदा में खरादी में चार भवन पूर्ण क्षतिग्रस्त हुए थे। 9 जुलाई तक बड़कोट तहसील क्षेत्र में 30 भवन पूर्ण, 16 तीक्ष्ण एवं 152 आंशिक क्षतिग्रस्त हो गए। 17 पशुओं की मौत हुई, 231 लोगों को अहेतुक सहायता बांटी गई। 20 जुलाई को तीक्ष्ण क्षतिग्रस्त भवनों की संख्या 31, आंशिक क्षतिग्रस्त की 170 तथा पशु हानि 27 पहुंच गई। इसी तरह आठ अगस्त तक पूर्ण क्षतिग्रस्त भवनों की संख्या 31, तीक्ष्ण क्षतिग्रस्त की 60 व आंशिक क्षतिग्रस्त की 293 तथा पशु हानि 48 पहुंच चुकी है।
इन लोगों को सरकारी मानकों के अनुसार राहत सहायता के अलावा 821 लोगों को 8-8 हजार रुपये अहेतुक सहायता बांटी जा चुकी है। इसमें अकेले खरादी में ही 225 लोगों को अहेतुक सहायता बांटी गई। सूत्रों की मानें तो बीते वर्षों की भांति इस बार भी सुविधा शुल्क के आधार पर मानकों को ताक पर रख सरकारी खजाने की बंदरबांट की जा रही है।

तीक्ष्ण क्षतिग्रस्त, अहेतुक सहायता में हुई गड़बड़ी
बड़कोट। नाम न छापने की शर्त पर एक पटवारी ने बताया कि खरादी को छोड़कर अन्य जगहों पर भवनों का नुकसान नहीं हुआ। कृषि भूमि को जरूर नुकसान पहुंचा, जबकि फर्जी अभिलेख तैयार कर मानकों के विपरीत अपात्रों को भी धड़ल्ले से राहत राशि बांटी जा रही है। सबसे ज्यादा घालमेल तीक्ष्ण क्षतिग्रस्त भवन तथा अहेतुक सहायता वितरण में है।

क्षेत्र में वास्तविक आपदा पीड़ित आज भी राहत सहायता से वंचित हैं, जबकि कई अपात्र सरकारी सहायता डकार रहे हैं। इसकी उच्चस्तरीय जांच होनी जरूरी है। – मानेंद्र चौहान, निवासी नगाण गांव

16-17 जून की तबाही के बाद चटक धूप में भी भवनों को नुकसान हुआ। इसी वजह से क्षतिग्रस्त भवनों की संख्या में इजाफा हुआ। खरादी में अहेतुक सहायता वितरण में गड़बड़ी हुई। तहसीलदार से इसकी जांच कराई जा रही है। – देवमूर्ति यादव, एसडीएम बड़कोट

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