
चंबा। होलीवासियों के लिए जी का जंजाल बनी पावर प्रोजेक्ट की सुरंग को लेकर राज्य बिजली बोर्ड की एक अहम जांच रिपोर्ट सामने आई है। बिजली बोर्ड के निदेशक (सिविल) कार्यालय ने ग्रामीणों के विरोध और कोर्ट में पीआईएल दाखिल होने के बाद 30 जुलाई 2012 को 180 मेगावाट की बजोली होली परियोजना की सुरंग और पावर हाउस के स्थानांतरण पर अपनी रिपोर्ट तैयार की थी। तब से इस रिपोर्ट को दबा कर रखा गया। इस कारण प्रोजेक्ट की सच्चाई सामने नहीं आ पाई। हिमधरा पर्यावरण शोध संगठन के राहुल सक्सेना ने इसे आरटीआई से हासिल किया है। उन्होंने बताया कि इस रिपोर्ट को हाईकोर्ट में पेश न करके एक बड़ा सच छिपाया गया है। इस रिपोर्ट को निदेशक (सिविल) सहित करीब आधा दर्जन अधिकारियों ने बोर्ड के अन्य वरिष्ठ अभियंताओं के परामर्श से तैयार किया है। इसमें रावी नदी के दाएं तट से बाएं तट पर स्थानांतरित करने के पीछे दिए जा रहे एक-एक तर्क का आकलन किया गया है। इस आधार पर कहा गया है कि भले ही दाईं ओर से सुरंग निर्माण के चलते कंपनी को 1-2 वर्षों का समय अधिक लगे, लेकिन ऐसा न करने से स्थानीय जनता और पर्यावरण को होने वाले नुकसान की भरपाई बहुत लंबे समय में भी नहीं हो सकेगी। रिपोर्ट के अनुसार परियोजना स्थल का भ्रमण करने वाले किसी भी व्यक्ति को साफ तौर पर दिख सकता है कि हरे भरे गांवों, खेतों, वनों और बगीचों भरे बाएं तट के बजाय वीरान और पथरीले दाएं तट पर ही परियोजना का निर्माण होना चाहिए। रिपोर्ट में कहा गया है कि हरे-भरे क्षेत्र को केवल इसलिए बर्बाद नहीं किया जा सकता क्योंकि वहां पर काम करना आसान है। दाएं तट पर निर्माण के विरोध में कंपनी की ओर से नए पुल और सड़कों के निमार्ण के तर्क को खारिज करते हुए कहा गया है कि इस प्रकार के पुल और सड़कें एनएचपीसी की ओर से चमेरा दो व तीन परियोजनाओं के लिए बनाए गए हैं। सुरंग तक पहुंच के लिए यह अस्थायी पुल निमार्ण कार्य समाप्त होने के बाद किसी अन्य निर्माण स्थल पर भेजे जा सकते हैं या बेचे जा सकते हैं। जीएमआर की उस दलील को भी खारिज किया गया है, जिसमें कहा गया है कि दाएं तट पर पहाड़ भूगर्भीय दृष्टि से उपयुक्त व मजबूत नहीं है। इसकी मजबूती को भारतीय भूगर्भीय सर्वेक्षण ने सत्यापित किया है। इस रिपोर्ट में और भी कई अहम टिप्पणियां मौजूद हैं।
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रिपोर्ट के बारे में पूछा नहीं गया था : दत्ता
बोर्ड के डायरेक्टर सिविल एके दत्ता ने बताया कि कोर्ट में रिप्लाई से पहले उन्होंने फील्ड में जांच की थी। उन्होंने कहा कि बोर्ड से इस रिपोर्ट बारे किसी भी पक्ष ने नहीं पूछा। इस कारण इसे कोर्ट में प्रस्तुत नहीं किया गया। बिजली बोर्ड ने पहले जो स्टैंड लिया था, उस आधार पर यह ताजा रिपोर्ट तैयार की गई थी।
