तबादला नीति से मेडिकल की पढ़ाई चौपट

भल्याणी (कुल्लू)। सरकार तथा शिक्षा विभाग की नई तबादला नीति बच्चों पर भारी पड़ने लगी है। नई तबादला नीति के तहत टीजीटी मेडिकल साइंस के मास्टरों की तैनाती मिडल स्कूलों में नहीं होगी। ऐसे में मुन्ने को जीव विज्ञान तथा वनस्पति विज्ञान की शिक्षा देने वाला सरकारी मिडल स्कूलों में कोई नहीं।
टीजीटी, नॉन मेडिकल के मास्टर जी को मेडिकल की शिक्षा देने का जिम्मा सौंपा है। हैरत इस बात की है कि इन गुरुओं ने जब स्वयं ही उपरोक्त विषय में पठन-पाठन नहीं किया है, तो वह कैसे बच्चों को इन विषयों में पढ़ा पाएंगे। इसको लेकर शिक्षा विभाग के इन स्कूलों में अपने बच्चों की पढ़ाई करवाने वाले अभिभावक चिंतित हो उठे हैं।
जिला कुल्लू में 130 मिडल स्कूल सरकार द्वारा संचालित किए जा रहे हैं। इनमें महज 20 मेडिकल साइंस के टीचर ही तैनात हैं। नई नीति के तहत इन मिडल स्कूलों में अब मेडिकल साइंस के शिक्षकों की तैनाती नहीं होगी।
अभिभावक चिंतित हो उठे हैं कि आखिर उनका मुन्ना कैसे मेडिकल साइंस की शिक्षा ग्रहण करेगा। सरकारी स्कूलों में पठन-पाठन करने वाले जिला के बच्चे अब मेडिकल साइंस की शिक्षा से ग्रहण करने में मुश्किल भी महसूस करने लगे हैं। बच्चे मेडिकल साइंस में पिछड़ने लगे हैं। शिक्षाविद बाला राम ठाकुर सरकार तथा शिक्षा विभाग की इस नई तबादला नीति पर हैरानी और चिंता जताते हुए कहा कि सरकार को इस पर पुन: विचार करना चाहिए। अभिभावक राम सिंह, अनूप राम, रीता देवी, चमन कूपर तथा दीपक शर्मा ने सरकार तथा विभाग से सवाल किया है कि आखिर कैसे नॉन मेडिकल का शिक्षक उनके बच्चों को मेडिकल साइंस की शिक्षा दे पाएंगे।
सरकार के स्तर पर हुआ है फैसला
फैसला सरकार और विभाग के उच्च अधिकारियों के स्तर पर लिया गया है। विभाग की नई पॉलिसी के अनुसार मिडल स्कूलों में मेडिकल शिक्षकों की तैनाती नहीं होगी। इन स्कूलों में मेडिकल साइंस पढ़ाने का जिम्मा टीजीटी और नॉन मेडिकल के अध्यापकों को सौंपा गया है।

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