तालिबान से बातचीत कर सकता है पाकिस्तान

तालिबान से बातचीत कर सकता है पाकिस्तान

इस्लामाबाद: पाकिस्तान सरकार और अफगानिस्तान से लगती सीमांत में सक्रिय पाकिस्तान तालिबान से बातचीत फिर से शुरू कराने के लिए दो महत्वपूर्ण धार्मिक नेताओं ने अपनी दिलचस्पी दिखाई है। जमात उलेमा-ए-इस्लाम और जमात-ए-इस्लामी के नेताओं ने कहा है कि अगर पाकिस्तान सरकार तहरीक-ए-तालिबान से बातचीत करने को राजी है तो वे अपनी ‘उत्तरदायी भूमिका’ का निर्वहन करेंगे।

मालूम हो कि पिछले दो माह से पाकिस्तान सरकार और पाकिस्तान तालिबान तहरीक-ए-तालिबान के बीच बातचीत बंद है। जमात उलेमा-ए-इस्लाम के नेता मौलाना फजलुर रहमान ने कहा कि अगर पाकिस्तान सरकार बातचीत करना चाहती है तो वे जिरगा काउंसिल में इस मद्दे को वार्ता की मेज पर सुलझाने में मदद करेंगे नवाज शरीफ के तीसरी बार सत्ता संभालने के बाद सरकार के महत्वपूर्ण घटक दलों में एक जमात उलेमा-ए-इस्लाम(जे-यूआई-एफ) के नेता मौलाना फजलुर रहमान ने प्रधानमंत्री नवाज शरीफ को तालिबान से बातचीत करने का पांच सूत्री एजेंडा का प्रस्ताव दिया था।

वहीं एक अन्य महत्वपूर्ण धार्मिक नेता और जमात-ए-इस्लामी के अमीर सैय्यद मुनव्वर हसन ने तालिबान से इस मुद्दे पर सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाने की मांग की है। इस मांग पर प्रतिक्रिया देते हुये तहरीक-ए-तालिबान(टीटीपी) के प्रवक्ता ने मौलाना फजलुर रहमान और सैय्यद मुनव्वर हसन की मध्यस्थता में पाकिस्तान सरकार से बातचीत पर अपनी सहमति जता दी है। तहरीक-ए-तालिबान के दूसरे नंबर में नेता वली उर्र रहमान की अमेरिकी ड्रोन हमले में मौत के बाद पाकिस्तान सरकार से बातचीत बंदकर लिया था जिससे पश्चिमी सीमांत में स्थिति बिगड गई थी।

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