
उत्तरकाशी। घुंडी के घने जंगल में हो रहे भूस्खलन से पिलंग तथा जौडाऊ गाड़ के संगम में झील बनने लगी है। जिससे यहां खेती की जमीन डूबने के आसार नजर आने लगे हैं।
इन दिनों भूस्खलन की चपेट में आए सैकड़ों विशाल पेड़ मलबे के साथ पिंलग गाड़ की ओर खिसक रहे हैं। पानी के साथ जमा पेड़ मिट्टी पत्थर के मलबे के साथ नदी के संकरे हिस्से में जमा होने से यहां झील बनने लगी है। ऐसे में दोनों गांवों की आजीविका का प्रमुख साधन रामदाना की खेती वाली जमीन उसमें समा कर नष्ट हो जायेगी। जून की आपदा में गंगाडा में करीब 200 नाली जमीन पहले ही बह चुकी है।
अभी स्थिति यह है कि घोड़ों के चलने लायक तो दूर पीठ पर सामान लेकर चलने लायक रास्ता भी नहीं है। लोगों को आटा-चावल जैसी जरूरी रसद भी नहीं मिल पा रही है। पिंलग के लिए 18 किमी का पैदल रास्ता भूस्खलन क्षेत्र के ऊपर से होकर जाने के कारण 28 किमी का हो गया है। नीचे खड़गला में रास्ता पिंलग नदी में बह जाने के कारण लोग वहां अटके आठ फुट के बड़े पत्थर से चिपककर किसी तरह आवाजाही कर रहे है। गेंहू चावल खत्म होने के बाद लोग जून में तैयार चिणा को ओखली में कूट कर मठ्ठे के साथ पका कर उसी के सहारे जीवन काट रहे है। जौड़ाऊ गांव की भी यही स्थिति है।
स्कूल नहीं जा पा रहे बच्चे
उत्तरकाशी। पैदल मार्ग तथा पुलिया बहने से अलग-थलग पड़े जौडाऊ गांव के पिंलग जूनियर हाईस्कूल में पढ़ने वाले सात बच्चे जुलाई से अभी तक स्कूल नहीं आये। अगली कक्षा में प्रवेश की औपचारिता पूरी न कर पाने के कारण विद्यालय की पंजिका में इनका नाम ही दर्ज नहीं हो पाया है।
