
ऊना। विजिलेंस एंड एंटी करप्शन ब्यूरो ने स्वां नदी तटीयकरण परियोजना में घपलों के आरोपों के चलते प्रोजेक्ट के रिकार्ड को अपने कब्जे में लिया है। ब्यूरो की इस कार्रवाई से कइयों के हाथ पांव फूल गए हैं। ब्यूरो ने घपले के आरोपों पर जांच तेज कर दी है। प्रोजेक्ट के कई अफसर और कर्मी ब्यूरो के निशाने पर हैं। ब्यूरो कइयों की संपत्ति की भी जांच कर सकता है। धर्मशाला स्थित विजिलेंस एंड एंटी करप्शन ब्यूरो के एसपी बिमल गुप्ता ने रिकार्ड को कब्जे में लेने की पुष्टि की है। कांग्रेस की चार्जशीट की प्रति धर्मशाला पहुंचने के बाद अब ब्यूरो ने यह कार्रवाई की है। ऊना में चल रहा स्वां चैनेलाइजेशन प्रोजेक्ट भी चार्जशीट में शामिल है। अब तक इस प्रोजेक्ट पर 235 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं। स्वां तथा इसकी सहायक नदियों को चैनेलाइज करने के लिए 1200 करोड़ रुपये और स्वीकृत हुए हैं। चार्जशीट में पिछली सरकार में परियोजना के तहत खर्च किए गए 235 करोड़ रुपये में बंदरबांट के आरोप लगे हैं। हाल ही में जिप अध्यक्ष रानी रणौत के नेतृत्व में भी जिप की चार सदस्यीय कमेटी ने अपने स्तर पर घपले के आरोपों पर स्पाट विजिट किया। कई जगह निम्न स्तर के कार्य की वीडियोग्राफी की भी गई। स्वां नदी तटीयकरण परियोजना में मिस यूटिलाइजेशन आफ फंड के गंभीर आरोप हैं। गाइडलाइंस के अनुसार कार्य नहीं हुए हैं। ई-टेंडरिंग शुरू होने से भी कई बातों का खुलासा होने के सनसनीखेज आरोप हैं। विजिलेंस एंड एंटी करप्शन ब्यूरो के एसपी बिमल गुप्ता ने बताया कि प्रोजेक्ट के कुछ रिकार्ड को कब्जे में लिया गया है। उन्होंने कहा कि अभी कुछ और रिकार्ड को भी ब्यूरो अपने कब्जे में लेगा। एसपी ने कहा कि घपले के आरोपों की बारीकी से छानबीन होगी।
ई टेंडरिंग से हुए यह खुलासे
आरोप हैं कि 235 करोड़ रुपये खर्च करने के लिए ई-टेंडरिंग से पहले जो टेंडर लगे, उनमें मिलीभगत से कुछ लोगों को फायदा पहुंचाने के मकसद से गड़बड़ियां की गईं। इसमें परियोजना के कुछ अभियंता तथा अन्य अफसर भी संलिप्त बताए जा रहे हैं। जो काम पहले 20 लाख में कराया गया, ई-टेंडरिंग शुरू होने के बाद उसी कार्य की अनुमानित लागत 10 लाख से भी कम आंकी गई, जबकि समय बढ़ने के साथ-साथ पूर्व में हुए कार्य की अनुमानित लागत बढ़ जानी चाहिए थी।
