टुंडा का पकड़ा जाना , चूक है या आपरेशन अचूक

हल्द्वानी। अगर दिल्ली पुलिस ने देश के मोस्ट वांटेंड आतंकी अब्दुल करीब टुंडा को उत्तराखंड के बनबसा बार्डर से पकड़ा तो देश की सुरक्षा में भारी चूक हुई है। बनबसा में 24 घंटे अलर्ट रहने वाली देश की सर्वोच्च खुफिया एवं सुरक्षा एजेंसियों रॉ, आईबी, एमआई, लोकल इंटेलिजेंस, एसएसबी, सीआईएसफ और लोकल पुलिस को उसके नेपाल बार्डर से बनबसा में घुसने की भनक कैसे नहीं लगी। उनकी निगरानी के बावजूद टुंडा बार्डर पार कैसे और कब आ गया। इसबीच डीआईजी कुमाऊं जीएन गोस्वामी ने कहा है कि लोकल पुुलिस की जानकारी में टुंडा की गिरफ्तारी नहीं हुई है। संवेदनशीन मामला है । हो सकता है कि बाहरी एजेंसी की कार्रवाई हो ।
हैरानी की बात ये है कि दिल्ली पुलिस ने टुंडा के 15 अगस्त को बड़ी आतंकी साजिश की योजना से भारत आने की बात कही है। ऐसे में साफ है कि टुंडा 15 से पहले ही नेपाल बार्डर से बनबसा आ गया होगा। उसके वहां रहने की भनक क्यों वहां जमी एजेंसियों को नहीं लगी। चौंकाने वाली बात ये भी है कि अगर टुंडा पकड़े जाने से कुछ ही समय पहले नेपाल से बनबसा बार्डर पार आया था तो वो भी कैसे संभव हुआ। क्योंकि दोपहर में 2 से 6 तक ये बार्डर पूरी तरह सील रहता है। ऐसे में कई सवाल खड़े हो रहे हैं। पकड़े जाने के बाद भी ये एजेंसियां इस बात से इंकार कर रही है कि टुंडा का उत्तराखंड में मूवमेंट कभी था ही नहीं। जबकि दिल्ली पुलिस उसके यहां से पकड़े जाने की बात कह चुकी है। इस बात ने खुफिया एजेंसियों को और चिंतित कर दिया है कि टुंडा अगर बनबसा में था तो वह किसकी पनाह में रहा। बनबसा में अलर्ट पर रहने वाली ये एजेंसियां अब उसके सुराग तलाशने में लग गई है। साथ ही ये भी पता लगाया जा रहा है टुंडा के साथ और लोग तो इस बार्डर से उत्तराखंड में नहीं घुसे।

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