
जालंधर: पंजाब की सत्ता में काबिज अकाली दल की सहयोगी पार्टी भाजपा आगामी लोकसभा चुनावों में क्या मुंह लेकर जनता के बीच जाएगी। लोगों को क्या बताएगी कि पिछले डेढ़ साल से दोबारा सत्ता में आई भाजपा ने शहरों के लिए क्या किया। पिछले डेढ़ साल से शहर के हालात बदतर हो चुके हैं।
जगह-जगह से टूटी सड़कें, पीने के पानी की समस्या, स्ट्रीट लाइटों की समस्या, शहर के हर इलाके में लगे कूड़े के बड़े-बड़े ढेरों से दिन-प्रतिदिन शहरवासी अकाली-भाजपा सरकार को कोस रहे हैं। भाजपा के जनप्रतिनिधियों को तो अब सार्वजनिक स्थानों पर भी जनता के आक्रोश का सामना करना पड़ रहा है। पिछले लगभग साढ़े 6 सालों से पंजाब में सत्ता का सुख भोग रही अकाली-भाजपा सरकार में जालंधर में सब कुछ पहले जैसा ही था।
वो ही तीनों विधायक जो पिछली सरकार में थे अब भी वही तीनों विधायक हैं फिर शहर के हालात अब बदतर क्यों हो गए हैं। लोग इसका जवाब जनप्रतिनिधियों से मांग रहे हैं। सब कुछ वही है सिर्फ बदला तो शहर का प्रथम नागरिक यानी मेयर। एक ही बदलाव ने शहर के हालात बदल कर रख दिए। अब तो सत्ता पक्ष के नुमाइंदे भी जनता के दरबार में जाने से कतराने लगे हैं। अगर सत्ता पक्ष का कोई नेता जनता के हक में अपनी आवाज बुलंद करता है तो पार्टी हाईकमान उसे कारण बताओ नोटिस जारी कर देती है।
पिछले दिनों सत्ता पक्ष के पार्षद रवि महेंद्रू ने मेयर के वार्ड में बन रही अवैध कालोनी के बारे में आवाज उठाई तो उन्हें नोटिस जारी कर दिया। उसके बाद भाजपा के एक और पार्षद मिंटा कोछड़ ने भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठानी चाही तो उन्हें भी पार्टी से निकालने के प्रयास किए जाने लगे। अगर सत्ता पक्ष के पार्षद ही नगर निगम में सुनवाई न होने के आरोप लगाते रहें तो आम आदमी के साथ क्या होता होगा। इसका अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है।
बूथ स्तर तक कार्यकत्र्ताओं के गठन का दावा करने वाली भाजपा किस मुंह से जनता के बीच वोट मांगने जाएगी। अब तो भाजपा के वार्ड स्तर के नेता जिनके दम पर नेता सुख भोग रहे हैं और लालबत्ती वाली गाडिय़ों में घूम रहे हैं उनकी भी कोई पूछ नहीं हो रही है, जिससे आने वाले लोकसभा चुनावों में काम करने के लिए कार्यकत्र्ताओं की कमी भी खलेगी। भाजपा में आजकल धड़ेबंदी चरमसीमा पर है। एक व्यक्ति विशेष को नीचा दिखाने के लिए प्रदेश स्तर के नेता पार्टी की रही सही लुटिया भी डुबो रहे हैं।
भाजपा का अफसरशाही पर भी कोई कंट्रोल नहीं रहा है। अगर जालंधर नगर निगम की ही बात करें तो पिछले कई सालों से एक ही सीट पर टिके अधिकारी सत्ता पक्ष के लोगों की सुनवाई नहीं करते। नगर निगम के कमिश्रर विनय बुबलानी भी पिछले 4 साल से एक ही सीट पर टिके हुए हैं और अब उन्हें 4-4 विभाग सौंप दिए गए हैं।
पिछली सरकार में निकाय मंत्री रहे मनोरंजन कालिया ने अपने कार्यकाल के दौरान 700 करोड़ रुपए के विकास कार्य किए थे। शहर में 5 फ्लाईओवर और 92 करोड़ की लागत से रामामंडी क्षेत्र में शत-प्रतिशत पानी, सीवरेज, साफ-सुथरी सड़कों की सुविधा लोगों को दी गई थी। इसके अलावा नए फुटपाथ, साइन बोर्ड और भारी-भरकम राशि अपने फंड से शहर की कई धार्मिक, सामाजिक सोसाइटीका में वितरित की थी लेकिन अब पिछले डेढ़ साल से शहर के हालात ही बदल गए हैं।
करोड़ों रुपए के हुए विकास कार्य भी अब पानी में धुल गए हैं। अब तो विकास नाम की कोई चीज शहर में नजर नहीं आ रही है। लगता है कि सत्ता के नशे में चूर भाजपा की निंदा लोकसभा चुनावों के नतीजे आने के बाद ही खुलेगी।
