
बीजिंग: चीन के एक शीर्ष राजनयिक ने आज कहा कि उनका देश पड़ोसी देशों के साथ अपने विवादों की अनदेखी करेगी और न ही अपने मूल राष्ट्रीय हितों को छोड़ेगा। साथ ही, यह स्पष्ट कर दिया कि कोई भी देश बीजिंग से यह उम्मीद न करे कि वह अपनी संप्रभुता और सुरक्षा को नजरअंदाज कर कोई ‘कड़वा घूंट’ पियेगा।
चीन के सरकारी मीडिया में राष्ट्रपति शी जिनपिंग के नए नेतृत्व के तहत विदेश नीति की प्राथमिकताओं के बारे में छपे एक आलेख में स्टेट काउंसलर यांग जियेची ने कहा है, ‘‘हमें लक्ष्मण रेखा का अवश्य ध्यान रखना होगा, सर्वश्रेष्ठ के लिए काम करना होगा लेकिन बदतर स्थिति का सामना करने लिए तैयार होना होगा।’’
विदेश मंत्री रह चुके यांग अब भारत के साथ सीमा वार्ता पर विशेष प्रतिनिधि हैं। यांग ने ‘नई परिस्थितियों में चीन के कूटनीतिक सिद्धांत और व्यवहार में नवोन्मेष’ शीर्षक से आलेख में कहा है, ‘‘कॉमरेड शी जिनपिंग ने इस बात पर जोर दिया है कि शांतिपूर्ण विकास के लिए दृढ़ रूप से प्रतिबद्ध रहते हुए हम अपने उचित हितों को नहीं छोड़ेंगे और न ही अपने मूल राष्ट्रीय हितों से कोई समझौता करेंगे।’’
उन्होंने कहा कि लेकिन साथ ही चीन उनके साथ विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग को बढ़ावा देकर मतभेदों और समस्याओं को उचित तरीके से निपटाने की कोशिश करेगा।
उनकी यह टिप्पणी खासा मायने रखती है क्योंकि भारत और पड़ोसी देशों के साथ चीन संबंध सुधारने की कोशिश कर रहा है, जबकि इन देशों के साथ उसका लंबे समय से सीमा एवं समुद्री विवाद है।
यांग ने कहा कि कोई देश हमसे इस बात की उम्मीद न करें कि हम ऐसा कोई भी कडवा घूंट पी जायेंगे जो अपनी संप्रभुता ठेस पहुंचाता हो।
