
हल्द्वानी। जसपुर में 13 अगस्त को नकली नोटों का छापाखाना पकड़कर भले ही पुलिस ने एक बड़े गिरोह का भंडाफोड़ कर दिया हो मगर जांच में जो बातें सामने आ रही हैं उससेे पुलिस के साथ खुफिया एजेंसियों के भी होश उड़े हुए हैं। जांच के दौरान कुछ इस तरह के तथ्य सामने आ रहे हैं कि इस गिरोह के तार डी कंपनी से जुड़े हो सकते हैं। क्योंकि इनके पास मिली सुपर फाइन क्वालिटी की स्पेशल इंक (स्याही) का इस्तेमाल नोट छापने के लिए डी कंपनी करती है। एजेंसियां जांच में जुटी हैं कि आखिर ये स्पेशल इंक जसपुर तक कैसे पहुंची।
खुफिया एजेंसियों को आशंका है नेपाल से ये इंक आरोपियों तक पहुंची हो सकती है। सूत्रों की मानें तो नेपाल में इस तरह की स्पेशल नोट प्रिंटिंग इंक का इस्तेमाल डी कंपनी कर रही है और इसके छापे जाने वाले नकली नोट आसानी से पकड़े नहीं जाते। इन नोटों के साथ भी ऐसा ही हुआ। ये सुपर फाइन क्वालिटी की स्पेशल इंक का ही कमाल था कि प्रिंटिंग इतनी अच्छी हुई कि बैंक अधिकारी तक पकड़े गए सौ रुपये के जाली नोटों को असली मान बैठे थे, लेकिन गहन जांच के बाद नोट नकली पाया गया।
जांच के दौरान बैंक अधिकारियों ने पुलिस को बताया था कि इस क्वालिटी की स्पेशल इंक सिर्फ रिजर्व बैंक इस्तेमाल करता है जो कि ग्लोबल टेंडर के जरिये मिलती है। जिसकी सूचना इंटरपोल तक को दी जाती है। ऐसे में इसका किसी बाहरी एजेंसी या व्यक्ति को मिल पाना बेहद मुश्किल है। इस तथ्य के बाद पुलिस और खुफिया एजेंसियों ने जांच शुरू कर दी थी कि आखिर ये इंक आरोपियों तक कैसे पहुंची। जांच में ये भी पता लगाया जा रहा है कि इतनी बड़ी संख्या में यूपी और उत्तराखंड सरकार के स्टांप आरोपियों को किसने उपलब्ध कराए। एसएसपी ऊधमसिंह नगर रिद्धिम अग्रवाल ने बताया कि आरोपियों से अभी ज्यादा कुछ पता नहीं चला है। इतनी बड़ी संख्या में यूपी और उत्तराखंड के स्टांप पेपर उन्हें मिलने के बारे में भी जांच की जा रही है।
