
रोहड़ू। प्रदेश का एकमात्र राजकीय फार्मेसी कॉलेज सरकार की उपेक्षा का दंश झेल रहा है। आलम यह है कि राजकीय बी फार्मेसी कॉलेज के पास कक्षाएं चलाने के लिए एक भी कमरा उपलब्ध नहीं है। प्रदेश के विभिन्न जिलों से बी-फार्मेसी की शिक्षा प्राप्त करने आए विद्यार्थियों का भविष्य दांव पर लगा हुआ है।
रोहड़ू में राजकीय बी-फार्मेसी कॉलेज वर्ष 2005 में शुरू हुआ था। अपना भवन न होने के कारण सरकार ने बी फार्मेसी की कक्षाएं बहुतकनीकी संस्थान रोहड़ू के भवन में शुरू कीं। भवन में फार्मेसी की कक्षाएं चलाने के लिए दो कमरे उपलब्ध करवाए गए थे। हाल ही में सरकार ने किन्नौर बहुतकनीकी संस्थान के विद्यार्थियों की कक्षाएं भी रोहडू शिफ्ट कर दी हैं। जो दो कमरे फार्मेसी की कक्षाओं के लिए दिए गए थे, अब उनमें किन्नौर बहुतकनीकी संस्थान की कक्षाएं चलाई जा रही हैं। हालात यह हैं कि प्रदेश के एकमात्र फार्मेसी कॉलेज के पास कक्षाओं के लिए एक कमरा तक उपलब्ध नहीं है। किन्नौर बहुतकनीकी संस्थान की ओर से कक्षाएं लगाने के बाद जब थोड़ा समय कमरे खाली रहते हैं तब बी-फार्मेसी की नाममात्र कक्षाएं लगती हैं।
बी फार्मेसी कॉलेज में करीब 175 विद्यार्थी शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। कुछ टॉपर्स को ही राजकीय बी-फार्मेसी कॉलेज में प्रवेश मिलता है। प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए होनहार छात्रों का भविष्य अब दांव पर हैं। छात्रों के लिए हॉस्टल तक की सुविधा उपलब्ध नहीं है। हालांकि, बी-फार्मेसी कॉलेज का भवन रोहडू के अणु में निर्माणाधीन है। भवन का अधिकांश निर्माण पूरा हो चुका है लेकिन सरकार की उपेक्षा के चलते कॉलेज को नए भवन में शिफ्ट करने के लिए कोई भी उपयोगी कदम नहीं उठाए जा रहे हैं।
बी-फार्मेसी के विद्यार्थियों बृज मोहन, पंकज राय, राजन, रिचा डोगरा, निशा, विवेक धीमान, दीपक शानु, प्रेरणा, दिव्यानी ने बताया कि कक्षाएं चलाने के लिए एक भी कमरा उपलब्ध नहीं है।
किन्नौर बहुतकनीकी संस्थान की ओर से कक्षाएं लगाने के बाद जब थोड़ा समय कमरे खाली रहते हैं तब बी-फार्मेसी की नाममात्र कक्षाएं लगती हैं। इससे पढ़ाई प्रभावित हो रही है। छात्रों ने प्रदेश सरकार से मांग उठाई है कि कॉलेज को नए भवन में शिफ्ट किया जाए।
बी-फार्मेसी कॉलेज के प्रधानाचार्य प्रो. रंजीत सिंह ने माना कि कक्षाएं चलाने में काफी दिक्कतें पेश आ रही हैं। छात्रों की शिक्षा भी प्रभावित हो रही है।
