
श्रीनगर। केशोराय मठ को बचाने के लिए प्रशासन वायर क्रेट लगाने तक ही सीमित है, जबकि मंदिर के नीचे का हिस्सा पूरी तरह खोखला हो चुका है। अलकनंदा के तेज बहाव से मंदिर की नींव क्षतिग्रस्त हो चुकी है और काफी हिस्सा खोखला हो चुका है। अब मंदिर की स्थिति यह है कि तेज धूप या तेज बारिश होने पर मंदिर कभी भी ध्वस्त हो सकता है। प्रशासन अभी भी वायर क्रेट तक ही सीमित है। छात्र नेता अश्विनी उनियाल ने कहना है कि प्रशासन समय रहते मठ को बचाने के ठोस प्रयास करता तो आज केशोराय मठ का अस्तित्व खतरे में नहीं होता।
