
केलांग। लगातार भूकंप के झटके और बार-बार बादल फटना… कहीं ये बड़ी आपदा का संकेत तो नहीं। एक सप्ताह के भीतर लाहौल की मयाड़ घाटी में बिना बरसात के बादल फटने से तीन बार आई बाढ़ से लोग दहशत में हैं। घाटी में कुछ अंतराल के बाद लगातार भूकंप के झटके भी महसूस किए जा रहे हैं। वैज्ञानिक इससे चिंतित हैं।
बाढ़ के कारण मयाड और नैनगाहर इलाके में करोड़ों की संपत्ति का नुकसान हुआ है। बाढ़ प्रभावित इलाके से महज चंद किलोमीटर दूर एक बिजली परियोजना के निर्माण की तैयारिया चल रही हैं। चिनाव और इसकी सहायक नदी तथा नालों में करीब तीन हजार मेगावाट बिजली उत्पादन का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। बिजली उत्पादन के लिए चंद्रभागा नदी में कई बांधों को बनाया जाना प्रस्तावित है। पानी को डाइबर्ट करने के लिए हाई विलोसिटी ब्लास्टिंग के जरिये पहाड़ों के गर्भ को भेदकर कई किलोमीटर लंबी टनलों का निर्माण किया जाएगा। लाहौल-स्पीति भूकंप के लिहाजा से अति संवेदनशील जोन-5 में आता है।
ऐसे में यहां पर प्रस्तावित बड़ी बिजली परियोजनाओं का निर्माण अपने आप में कई सवाल उठाने लगा है। जीबी पंत मौहल के वरिष्ठ वैज्ञानिक जीसी कुनियाल का कहना है लाहौल में इस बार गर्मी का पारा सामान्य से करीब 2 डिग्री अधिक रिकार्ड किया गया है। उनके मुताबिक भूकंप के झटकों से ग्लेशियरों में दरार पड़ना स्वाभाविक है। गर्मी बढ़ने के कारण घाटी के ग्लेशियर भी धीरे-धीरे टूट रहे हैं। कुनियाल के मुताबिक बाढ़ आने का एक कारण यह भी हो सकता है। जिस्पा बांध संघर्ष समिति के संयोजक रिगजिन समफेल हायरपा का कहना है परियोजनाओं की आड़ में सरकार घाटी में विनाश का मसौदा तैयार कर रही है।
