प्रवेशद्वार पर जड़े ताले, हजारों बंद

व्यापारियों और प्रशासन की लड़ाई से मैदान में बंद हुए हजारों लोग
कीचड़ से भरे चौगान में खरीददारी करने उमड़ी थी भीड़
चंबा। मिंजर मेले के दौरान चौगान के तीन हिस्सों में चल रही व्यापारिक गतिविधियों को तय समय सीमा के भीतर रोक पाने में विफल प्रशासन ने सैकड़ों लोगों की सुरक्षा को ही जोखिम में डाल दिया। शनिवार को जब प्रशासन की ओर से कामकाज समेटने से आनाकानी रहे व्यापारियों को हटाने के लिए भेजे गए तहसीलदार, पटवारी व होमगार्ड के जवानों की नहीं चली तो चौगान के प्रवेश द्वारों पर ताले जड़ दिए गए। ऐसा करते समय मैदान में मौजूद सैकड़ों लोगों की सुरक्षा का ख्याल तक नहीं रखा गया। इसके अलावा पंडालों की बिजली भी काट दी गई। यह जानते हुए कि मेले के अंतिम दिनों में ही ग्रामीण काफी संख्या में खरीददारी करने पहुंचते हैं, प्रशासनिक अधिकारी लोगों को चौगान में प्रवेश से रोकने के पुख्ता उपाय नहीं कर पाए थे। हैरानी की बात है कि बड़े अधिकारी छुट्टी मनाने में व्यस्त रहे और तहसीलदार व कुछ होमगार्ड के जवानों को सैकड़ों व्यापारियों व हजारों लोगों पर काबू पाने के लिए भेज दिया गया। हैरानी की बात है कि प्रशासन के मेले के दौरान लोगों की पुख्ता सुरक्षा के वादे भी शनिवार को हवा होते दिखे। यह तो अच्छा हुआ कि अंधेरे में डूबे कीचड़ भरे पंडालों में किसी प्रकार की भगदड़ नहीं मची, नहीं तो हजारों लोगों के अंदर होते हुए चौगान के मुख्य द्वारों पर ताले जड़ना महंगा पड़ सकता था। चौगान के सारे बड़े गेट बंद होने के बाद लोगों को रुकावट वाले छोटे-छोटे रास्तों से आने-जाने में दिन भर धक्का-मुक्की का सामना करना पड़ा। इस कार्रवाई के दौरान प्रशासन ने पुलिस तक की मदद नहीं ली। पुलिस भी मेला समाप्त समझ कर सुरक्षा व्यवस्था समेट चुकी थी। उधर, लोगों की भारी भीड़ कीचड़ से भरे चौगान में पैर और कपड़े खराब होने के बावजूद धड़ाधड़ खरीददारी दिखी। शहर में ऐसा लग रहा था कि मानो लोग इसी दिन के इंतजार में थे। उधर, व्यापारी भीड़ को देखते हुए रविवार को भी सामान समेटने के मुड़ में नहीं हैं। इसे देखते हुए प्रशासन के लिए रविवार को इन्हें हटाना चुनौती से कम नहीं होगा।
इंसेट……
सिक्योरिटी की रकम मांगते दिखे व्यापारी
तहबाजारी कमेटी ने दुकानों का आबंटन करने के लिए व्यपारियों से सिक्योरिटी राशि ली थी। मेला समाप्त होने के बावजूद प्रशासन की ओर से व्यापारियों को यह राशि वापिस करने का इंतजाम नहीं किया गया था। करीब दो दर्जन व्यापारी एसडीएम कार्यालाय के कर्मियों से सिक्योरिटी मांगते दिखे। छुट्टी का दिन था तो प्रशासन द्वारा इसकी खास व्यवस्था की जानी चाहिए थी।

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