म्यूनीसिपल कौंसिल सरहिंद में लाखों का घोटाला

चंडीगढ़: सरहिंद निवासी आर.टी.आई. एक्टीविस्ट एन.के. सियाल के 7 वर्षों के प्रयासों के बाद सरहिंद म्यूनीसिपल कौंसिल में हुए 40 लाख से अधिक के घोटाले से पर्दा उठ गया है। विभाग ने मामले पर शुरूआती टालमटोल व मामले को लटकाने के पश्चात आखिरकार विजीलैंस जांच की रिपोर्ट के आधार पर म्यूनीसिपल कौंसिल के सैक्शन ऑफिसर हरमेल सिंह झंडू, सहायक म्यूनीसिपल इंजीनियर कुलविंद्र सिंह, ई.ओ. तरसेम लाल (सेवानिवृत्त), ई.ओ. चरणजीत सिंह तथा ई.ओ. विनोद मेहता (सेवानिवृत्त) को चार्जशीट कर दिया है। मामला म्यूनीसिपल कौंसिल के कोष का दुरुपयोग कर एक कालोनाइजर को अनुचित लाभ पहुंचाने से संबंधित है।

दस्तावेजों के अनुसार सियाल ने अक्तूबर 2006 में पंजाब सरकार के स्थानीय विभाग के तत्कालीन प्रधान सचिव को लिखे पत्र में उजागर किया था कि म्यूनीसिपल कौंसिल के अधिकारियों की ठेकेदार व कालोनाइजर के साथ सांठगांठ से कार्पोरेशन के कोष का दुरुपयोग कर निजी बिल्डर की कालोनी में सड़क निर्माण, जलापूर्ति, स्ट्रीट लाइटिंग तथा सीवरेज की सुविधा प्रदान की जा रही है जबकि पुडा द्वारा प्रोजैक्ट मंजूरी की शर्तों के अनुसार यह कार्य कालोनाइजर को अपने खर्चे से करना है। इस कारण कौंसिल कोष को 40 लाख से अधिक की चपत लगी है। मामला दबा रहने के पश्चात सियाल ने वर्ष 2007 में राष्ट्रपति व प्रधानमंत्री कार्यालयों के माध्यम से भी मामले को पंजाब सरकार के साथ उठाया।

विजीलैंस सैल की रिपोर्ट के अनुसार कौंसिल द्वारा अगस्त 2007 में उक्त कालोनी में सीवरेज कनैक्शन एवं सड़क निर्माण व जलापूर्ति के लिए कालोनाइजर को 18.42 लाख रुपए जमा करवाने के लिए कहा गया था लेकिन कालोनाइजर ने जलापूर्ति व सीवरेज कनैक्शन के लिए मात्र 7.36 लाख रुपए जमा करवाए जबकि सरकार की दरों से संबंधित हिदायतों के अनुसार यह राशि ही 17.93 लाख रुपए बनती थी। रिपोर्ट में उक्त अधिकारियों को विभिन्न अनियमितताओं व सरकारी कोष के दुरुपयोग का दोषी ठहराया गया जिसके आधार पर विभाग ने इन्हें चार्जशीट किया है।

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