माकपा पर भारी पड़ा भाजपा-कांग्रेस का एका

शिमला। नगर निगम सदन में एक बार फिर भाजपा और कांग्रेस की जुगलबंदी माकपा पर भारी पड़ी है। वीरवार को महापौर संजय चौहान की अध्यक्ष में आयोजित विशेष सदन के दौरान पार्षदों ने हाथ खड़े कर नेशनल इंफोर्मेटिक सेंटर (एनआईसी) को ई-गवर्नेंस प्रोजेक्ट देने से इंकार करते हुए ओपन टेंडर के माध्यम से निजी कंपनियों को बुलाने का फैसला लिया है। महापौर, उप महापौर सहित दो पार्षद एनआईसी को प्रोजेक्ट देने के पक्ष में थे जबकि शेष सभी पार्षदों ने ओपन टेंडर का समर्थन किया। एनआईसी के पक्ष में कई तर्क देने के बावजूद भाजपा और कांग्रेस के पार्षदों ने उप महापौर का विरोध किया। करीब दो घंटे तक चली लंबी बहस के बाद हाथ खड़े कर ओपन टेंडर का फैसला लिया गया।

अप्रैल 2011 में तैयार हुई थी डीपीआर
सहायक आयुक्त नरेश ठाकुर ने कार्यवाही शुरू करते हुए ई-गवर्नेंस प्रोजेक्ट की जानकारी देते हुए बताया कि नगर निगम को कंप्यूटराइज्ड करने के लिए अप्रैल 2011 को डीपीआर तैयार की गई थी। फरवरी 2012 में केंद्र सरकार ने इस प्रोजेक्ट के निगम को 11.20 करोड़ की राशि स्वीकृत की। अगस्त 2012 को आरएफपी निगम की वेबसाइट पर अपलोड किया गया। सितंबर 2012 को टेक्निकल और फाइनेंशियल बिड खोली जानी थी लेकिन तकनीकी और प्रशासनिक कारणों की वजह से आरएफपी को रद कर दिया गया। केंद्र सरकार द्वारा इस योजना को शुरू करने के लिए धन उपलब्ध करवाने की अवधि मार्च 2014 तक है।

नहीं आया कंसलटेंट, होगी कार्रवाई
ई-गवर्नेंस प्रोजेक्ट को बनाने के लिए गुड़गांव की एक कंपनी को कंसलटेंट नियुक्त किया गया था। करीब 12 लाख की राशि कंसलटेंट को देना तय हुआ था। कंसलटेंट को प्रोजेक्ट बनाने के लिए करीब 7 लाख की राशि का भुगतान भी कर दिया गया है। वीरवार को विशेष सदन में भाग लेने के लिए कंसलटेंट को भी बुलाया गया था लेकिन कंसलटेंट ने आने से इंकार कर दिया। महापौर ने कहा कि कंसलटेंट के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

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