
नई दिल्ली। जनकपुरी स्थित वेस्ट एंड मॉल की 12वीं मंजिल से बुधवार सुबह एक युवती ने छलांग लगा दी। युवती नीचे खड़े मॉल की सिक्योरिटी कंपनी के कर्मचारी पर जा गिरी। घटना में दोनों बुरी तरह से जख्मी हो गए। घायलों को माता चानन देवी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां डॉक्टरों ने युवती को मृत घोषित कर दिया। जबकि कर्मचारी की हालत नाजुक बनी हुई है। युवती के खुदकुशी करने के कारणों का पता नहीं चल पाया है।
युवती की पहचान रोहिणी सेक्टर-3 निवासी चंचल शर्मा (24) के रूप में हुई है। जानकारी के मुताबिक बुधवार सुबह करीब 11 बजे पुलिस को वेस्ट एंड मॉल की 12वीं मंजिल से एक युवक और युवती ने छलांग लगने की सूचना मिली। मौके पर पहुंची पुलिस ने दोनों को उपचार के लिए माता चानन देवी अस्पताल में भर्ती कराया। छानबीन के दौरान पुलिस को 12वीं मंजिल पर युवती का बैग और चप्पल मिला। जिसमें युवती का मोबाइल फोन, पहचान पत्र और कुछ अन्य कागजात थे। इसके जरिए युवती की पहचान सेक्टर -3, रोहिणी निवासी हरीश शर्मा की बेटी चंचल शर्मा के रूप में हुई। उसके परिवार में पिता और मां के अलावा एक भाई और एक बड़ी बहन हैं। वह वजीरपुर स्थित एक निजी कंपनी में काम करती थी।
वहीं घायल युवक की पहचान सुनील (28) के रूप में हुई। वह मॉल स्थित सिक्योरिटी कंपनी में काम करता था। जांच में पता चला कि छलांग सिर्फ चंचल ने लगाई थी। नीचे गिरने के दौरान वह सुनील के ऊपर गिर गई थी। पुलिस को चंचल के बैग से कोई सुसाइड नोट नहीं मिला। उसके पिता ने पुलिस को बताया कि चंचल एक माह से पीलिया से पीड़ित होने की वजह से काफी परेशान थी। हालांकि पुलिस इस बात पर यकीन नहीं कर रही है और उसकी मां व बहन से पूछताछ कर रही है।
हुई तेज आवाज और फर्श पर बिखरा खून
12वीं मंजिल से चंचल के छलांग लगाने के दौरान उसे किसी ने नहीं देखा। हालांकि उसके नीचे गिरते ही तेज आवाज हुई, तभी लोगों का ध्यान उस ओर गया। मॉल स्थित एक दुकान में काम करने वाले वरुण ने बताया कि आवाज सुनकर जब वह वहां पहुंचा तो देखा की युवती का सिर फट चुका था और आस-पास खून बिखरा पड़ा था। वहीं युवक के सिर में भी गंभीर चोट लगी थी। मॉल में ही काम करने वाले रक्षित ने भी यही जानकारी दी। घटना के बाद मॉल में केवल उन्हीं लोगों को प्रवेश की अनुमति दी गई जो वहां की दुकानों में काम करते थे। पुलिस अधिकारियों की माने तो वेस्ट एंड मॉल के लॉबी की रेलिंग काफी छोटी है। जिसकी वजह से कभी भी हादसा हो सकता है।
डेथ सेंटर में मौत की आहट से घबराया प्रशासन
सन 2000 और उसके बाद के दो-तीन वर्षों के दौरान के दौरान जनकपुरी डिस्ट्रिक्ट सेंटर के कई टावरों से छलांग लगाकर करीब डेढ़ दर्जन से अधिक लोगों ने जान दी थी। वर्ष 2006-07 में हर एक महीने में औसतन एक से दो लोग यहां मौजूद टावरों से कूदकर जान देते थे। इसी वजह से डिस्ट्रिक्ट सेंटर को डेंथ सेंटर के नाम से जाने जाना लगा। हालांकि बाद में रेलिंग को पूरी तरह बंद करने के बाद खुदकुशी की घटनाओं में कमी दर्ज की गई।
