
नई दिल्ली। महिला पुलिसकर्मी द्वारा एसएचओ के खिलाफ छेड़छाड़ की शिकायत को अनसुना करने पर अदालत ने कड़ी फटकार लगाई है। महिला सिपाही ने अपने ही थाने के एसएचओ पर छेड़छाड़ का आरोप लगाते हुए शिकायत दी थी, लेकिन अधिकारियों ने उसकी शिकायत पर आंखें मूंद लीं। इतना ही मजिस्ट्रेट कोर्ट ने भी पीड़िता की शिकायत को खारिज कर दिया था।
साकेत स्थित सत्र अदालत ने पीड़िता की शिकायत पर दोबारा सुनवाई व एसएचओ को तलब करने का निर्देश निचली अदालत को दिया है। अदालत ने मजिस्ट्रेट द्वारा पीड़िता की शिकायत पर रिपोर्ट का निर्देश न देने पर नाराजगी जाहिर की है। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश राजेंद्र कुमार शास्त्री ने कहा कि यह बड़े दुख की बात है कि जिस विभाग पर राजधानी के अपराध की जांच की जिम्मेदारी है, उसकी अपनी कर्मी से छेड़छाड़ का आरोप एसएचओ पर है।
अदालत की यह टिप्पणी महिला सिपाही की पुनर्विचार याचिका पर सुनवाई के बाद आई है। महिला सिपाही ने अपनी अधिवक्ता हिना शाह के जरिए मजिस्ट्रेट कोर्ट के आदेश को सेशन कोर्ट में चुनौती दी थी। मजिस्ट्रेट ने पीड़िता की शिकायत पर कालकाजी थाने के पूर्व एसएचओ बी एस राणा के खिलाफ एफआईआर का निर्देश देने से इंकार कर दिया था। शिकायत खारिज करते हुए मजिस्ट्रेट ने कहा कि पीड़िता ने पब्लिक का कोई गवाह पेश नहीं किया।
सेशन कोर्ट ने मजिस्ट्रेट कोर्ट का आदेश खारिज करते हुए कहा कि पहली नजर में यह संज्ञेय अपराध है और एफआईआर का निर्देश न देना गैर कानूनी है। सेशन कोर्ट ने पीड़िता को 12 अगस्त को निचली अदालत के समक्ष होने का निर्देश दिया है। बाइस वर्षीय पीड़िता ने अपनी शिकायत में कहा कि जनवरी 2012 में उसकी पोस्टिंग कालकाजी थाने में थी। उसके एसएचओ ने वहां पर उससे छेड़छाड़ की थी। जब पीड़िता ने इसकी शिकायत वरिष्ठ अधिकारियों से की तो उसका तबादला सरिता विहार थाने में कर दिया गया।
