शिक्षकों के बिना कैसे सुधरेगा शिक्षा का स्तर

कुल्लू। जिला की शिली राजगिरी पंचायत के स्कूलों में अध्यापकों की कमी से बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। खास कर प्राइमरी स्कूल राजगिरी में एक अध्यापक 103 नौनिहालों को शिक्षित कर रहा है। इस समस्या को लेकर पंचायत ने एलीमेंटरी शिक्षा उपनिदेशक को पत्र सौंप कर रिक्त पदों को भरने की मांग की थी, लेकिन स्कूल के हालात जस के तस हैं। इस कारण नौनिहालों की शिक्षा का स्तर गिरता जा रहा है। इस कारण अभिभावक चिंतित हैं। वहीं, पंचायत के अन्य स्कूल कावा और लोट में भी जेबीटी अध्यापकों के पद खाली होने से बच्चों को बेहतर शिक्षा नहीं मिल पा रही है। अभिभावक गुरदयाल सिंह, भगत राम, रामदेई, शकुंतला देवी, मोहर सिंह, तुले राम, जगत राम, संगत राम और खीम दासी ने कहा कि एक ओर सरकार और विभाग शिक्षा की बेहतरी के बड़े-बड़े दावे करती हैं और दूसरी ओर स्कूल अध्यापकोें के बिना ही चल रहे हैं। उन्होंने कहा कि ग्रामीण इलाकों के स्कूलों की हालत सबसेे खराब है, जबकि शहर और सड़क सुविधा से जुड़े स्कूलों में सरप्लस अध्यापकों की भरमार है। उन्होंने कहा कि बिना टीचरों के उनके बच्चों का भविष्य कैसे संवरेगा। पंचायत उपप्रधान राम लाल और स्कूल प्रबंधन समिति के अध्यक्ष जगत राम ने शिक्षा विभाग से बच्चों के उज्ज्वल भविष्य को देखते हुए राजगिरी स्कूल के अलावा कावा और लोट स्कूल में रिक्त पदों को भरने की मांग की है।

-12 अगस्त से स्कूल खुल रहे हैं, ऐसे में प्राइमरी स्कूल राजगिरी में दो अतिरिक्त अध्यापकों की तैनाती की जाएगी। इस संबंध में आदेश जारी कर दिए हैं। जबकि कावा और लोट स्कूल के रिक्त चल रहे पदों को भी भरने का प्रयास किया जाएगा।

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