
रुद्रप्रयाग। करोड़ों की लागत से निर्मित रुद्रप्रयाग-जवाड़ी बाइपास मोटर मार्ग 80 मीटर धंस चुका है, जबकि धंसाव अभी भी जारी है। मार्ग के धंसने से उत्यासू के ग्रामीणों को लंबा रास्ता तय कर जाना पड़ रहा है। यदि भू-धंसाव जारी रहा तो मार्ग के ऊपर बने वन विभाग का परिसर भी खतरे की जद में आ सकता है।
मंदाकिनी नदी के वैली ब्रिज से करीब डेढ़ किमी आगे वन विभाग के दफ्तर के नीचे रुद्रप्रयाग-जवाड़ी बाइपास मोटर का लगभग 80 मीटर पैच धंस चुका है। यह मार्ग अब लोगों की पैदल आवाजाही के लायक भी नहीं रह गया है, ऐसे में उत्यासू के लोगों को लगभग एक किमी अतिरिक्त चलना पड़ रहा है। जबकि यह मार्ग जवाड़ी, रौंठिया, तरवाड़ी, दरमोला, काला पहाड़, माई की मढ़ी, डीएफओ कार्यालय सहित अन्य गांवों को जोड़ने का एकमात्र सहारा है। यदि धंसाव नहीं रुकता है तो ठीक इसके ऊपर बने डीएफओ के बंगले को भी खतरा हो जाएगा। मार्ग के नीचे अलकनंदा बह रही है जिससे आसपास के लोग रात बढ़ते जलस्तर के खतरे के कारण सो भी नहीं पा रहे हैं। सच्चिदानंद नगर निवासी उर्मिला पटवाल और ओम प्रकाश सेमवाल बताते हैं कि रात में पत्थर गिरने की आवाज डराती है। यदि पूरा पैच नदी में समा गया, तो खतरा हो सकता है।
