कुदरत ने छीना घर और रोजगार

कर्णप्रयाग। पिंडरघाटी के तहसील मुख्यालय थराली के नासीर बाजार में आपदा के बाद से भुखमरी के हालात पैदा हो गए हैं। आर्थिक रूप से संपन्न बीस प्रतिशत लोग जहां अन्यत्र चले गए हैं, वहीं कुछ टूटे घरों में जीवन यापन करने को मजबूर हैं।
मजदूरी करने वालों पर कुदरत की दोहरी मार पड़ी है। घर टूटने के साथ ही उनका रोजगार भी खत्म हो गया है। प्रभावित पप्पू खान कहते हैं कि अपर बाजार में घर तो टूट ही गया है। मुख्य बाजार में दुकान थी, उस पर भी दरारें आ चुकी हैं। तीन बच्चों के साथ फिलहाल टेंट में रह रहा हूं, लेकिन बिना रोजी-रोटी के गुजारा कैसे होगा। रईस खान स्टोव, प्रेशर कुकर सहित छाता बनाने का काम करता था। मकान तबाह होने के बाद अब काम के भी लाले पड़ गए हैं। बुजुर्ग गोपाल राम कहते हैं कि पहले लकड़ी बिन लेते थे, किसी होटल या दुकान वाले से इन लकड़ियों के कुछ रुपये मिल जाते थे। इससे गुजारा हो जाता था, लेकिन अब आगे का बुढ़ापा कैसे कटेगा सूझ नहीं रहा है।

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