
जसपुर। दो पक्षों में झगड़े की सूचना पर पहुंचे सिपाही की पिटाई की कहानी किसी के गले नहीं उतर रही। सिपाही पिटा तो है मगर क्यों? झगड़े की सूचना सिपाही को ही क्यों दी गई? सूचना पर सिपाही अकेले क्यों गया? भीड़ ज्यादा थी तो उसने जाते ही और फोर्स क्यों नहीं बुलाई? डेढ़ घंटे तक सिपाही ने घटना का अपडेट नहीं दिया तो पुलिस क्यों बैठी रही? इसी तरह के तमाम सवाल घटना के बाद उठने लगे हैं। स्थानीय लोगों ने भी पुलिस की कार्रवाई को गलत बताते हुए विरोध शुरू कर दिया है। उनका आरोप है कि घटना के पीछे की कहानी कुछ और ही है।
घायल सिपाही महेंद्र सिंह ने दर्ज रिपोर्ट में कहा कि झगड़े की सूचना कोतवाली में देकर ही वह अकेला निकला था। जबकि उसके जाते ही उससे संपर्क कर कोतवाली को और फोर्स तुरंत वहां भेजना चाहिए था। दो पक्षों में झगड़ा हो रहा था तो दूसरे पक्ष ने सिपाही को बंधक बनाने की सूचना पुलिस को क्यों नहीं दी। दूसरा पक्ष कौन था। क्या सिपाही को बंधक बनाकर पीटने की जानकारी आरोपियों के अलावा किसी को नहीं मिली। जबकि घायल सिपाही महेंद्र सिंह की पत्नी गंगोत्री देवी (25) ने बताया कि उनके मकान मालिक धर्मवीर की पत्नी शशिकला ने उसे झगड़े की और सिपाही को बंधक बनाने की सूचना दी थी। हैरानी की बात ये है कि पत्नी सिपाही को छुड़ाने अकेले ही मकान मालकिन के साथ पहुंच गई। जबकि उसे तुरंत पुलिस को सूचना देनी चाहिए थी। पत्नी का कहना है कि वह पति को छुड़ाने पहुंची तो लोगों ने उससे भी बदसलूकी की। फिर भी वह लोगों से मिन्नत करती रही। ये भी किसी के गले नहीं उतर रहा। मकान मालकिन शशिकला ने सिपाही को बंधक बनाए जाने की सूचना कोतवाली पुलिस को दी। कोतवाल जेसी पाठक ने बताया कि आरोपियों ने सिपाही को मारपीट कर बेहोश कर दिया था। घायल सिपाही ने रिपोर्ट में कहा कि उसे पीटने वाले आरोप लगा रहे थे कि वह अपने मकान मालिक का झगड़े में पक्ष करता है।
