
उत्तरकाशी। बाढ़ और भूकंप की त्रासदियां झेल चुका नगर क्षेत्र अब एक और मुसीबत में फंस गया है। यह मुसीबत जमीन से फूट रहे जलस्रोतों से है। कई घरों से इस तरह के जलस्रोत फूटने के बावजूद प्रशासन गंभीर नजर नहीं आ रहा है। स्थिति यह है कि अब तक मौके पर कोई अधिकारी नहीं गया। भू-वैज्ञानिकों की मानें तो इससे मकानों में दरारें पड़ने का खतरा है। पानी का रिसाव तेज होने से भारी नुकसान की संभावना से इनकार भी नहीं किया जा सकता है।
पिछले वर्ष अगस्त की बाढ़ से संगमचट्टी से गंगोरी और गंगोरी से मनेरा तक नदी में चार लाख 35 हजार 550 घनमीटर मलबा जमा हो गया था। दिसंबर में आपदा प्राधिकरण की टीम ने सर्वे कर मलबा हटाने के लिए सात स्थान चिह्नित किए थे, लेकिन मात्र 15 हजार घन मीटर मलबा ही हटाया जा सका। इस बार जून की बाढ़ में भी काफी मलबा आया। जिससे भागीरथी नदी का तल उत्तरकाशी शहर के बराबर हो गया है। नदी से करीब 500 मीटर दूर अतर सिंह भंडारी के होटल, सुंदर सिंह पंवार के घर तथा एक फोटो स्टूडियो में कई दिनों से पानी के स्रोत फूटे हुए हैं। होटल के कई हिस्सों से पानी आ रहा है। मोटर लगाकर पानी बाहर निकाला जा रहा है। आशंका इस बात की भी जताई जा रही है कि ऐसी स्थिति कई और स्थानों पर भी सामने आ सकती है। इस बात से लोग आतंकित हैं कि कहीं इस बार उत्तरकाशी को जमीन न निगल ले।
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घरों में निकल रहे पानी की सफाई नगर पालिका से करवाई जाएगी। जरूरत पड़ी तो भू-वैज्ञानिकों से सर्वे कराकर यह भी पता लगवाया जाएगा कि यह पानी कहां से आ रहा है। – डा. पंकज पांडे, जिलाधिकारी
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यदि नदी का तल शहर के बराबर है तो नदी के पानी के रिसाव से मना नहीं किया जा सकता। वास्तविक स्थिति का पता जांच के बाद ही लग पाएगा। इससे घरों में दरारें आने का खतरा बना रहता है। – डा.एन बालागन, एसोसिएट प्रोफेसर अर्थ साइंस डिपार्टमेंट आईआईटी रुड़की
भूस्खलन से गंगोत्री राजमार्ग अवरुद्ध
उत्तरकाशी। भूस्खलन से गंगोत्री राजमार्ग के बंद होने का सिलसिला जारी है। रविवार रात तेज बारिश से उत्तरकाशी से डुंडा के बीच तीन स्थानों पर मार्ग बंद हो गया।
उत्तरकाशी गंगा घाटी के लोगाें के लिए गंगोत्री राजमार्ग मुसीबत बन गया है। दो महीने से गंगोत्री राजमार्ग उत्तरकाशी से धरासू के बीच कई स्थानों पर बार-बार बंद हो रहा है। रविवार रात तेज बारिश से बड़ेथी चुंगी, रतूड़ीसेरा और बंदरकोट में सड़क बंद हो गई थी। बाद में रतूड़ीसेरा और चुंगी बडेथी में बीआरओ ने सोमवार दोपहर तक मार्ग खोल दिया था, लेकिन बंदरकोट में मार्ग अब भी बंद पड़ा हुआ है। राजमार्ग बंद होने से लोगों को भारी दिक्कतें हो रही हैं। डुंडा- उत्तरकाशी के बीच लोग पैदल ही आवाजाही कर रहे हैं।
पानी में डूबा पुल, 43 गांवों का संपर्क टूटा
चिन्यालीसौड़। देवीसौड़ पुल एक बार फिर जलमग्न हो गया है। जिससे दिचली-गमरी पट्टी के 43 गांव अलग-थलग पड़ गए हैं। सोमवार को टिहरी बांध की झील का जलस्तर आरएल 816 मीटर पहुंचने पर देवीसौड़ पुल आठवीं बार जलमग्न हो गया। वैकल्पिक व्यवस्था के नाम पर पुनर्वास निदेशालय ने 45 और 60 सीटर दो मोटर बोट लगाई हैं, लेकिन इतनी बड़ी आबादी के लिहाज से यह नाकाफी है। बोट सुबह साढ़े छह से शाम पांच बजे तक ही चलेंगी। ऐसे में सबसे ज्यादा परेशानी स्कूली बच्चों और गर्भवती महिलाओं तथा अन्य मरीजों के सामने आपात स्थिति के समय आ सकती हैं।
परेशानी का सबब बना कू ड़ा करकट
पुल पानी में डूबा और लोगों की मदद के लिए बोट लगा दी गई, लेकिन झील में जमा कूडा-करकट बोट के संचालन में बाधक बन रहा है। कई बार बोट इस कूड़े में अटक रही है।
