
मशोबरा। सुन्नी बालिका आश्रम से दो लड़कियों का अपहरण और मशोबरा आश्रम से दो लड़कियों के भागने से आश्रमों की सुरक्षा व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। ‘अमर उजाला’ टीम ने सोमवार को राजधानी से 11 किलोमीटर दूर मशोबरा बालिका आश्रम का जायजा लिया। यहां रहने वाली 69 लड़कियों की सुरक्षा भगवान भरोसे ही है। रात के समय आश्रम में सिर्फ एक अधीक्षक और एक आया की देखरेख में यह लड़कियां रहती हैं। आश्रम के चारों ओर लगे कंटीले तार जगह-जगह टूटे हुए हैं। इन तारों को लांघकर कोई भी आश्रम में आसानी से आ-जा सकता है। आश्रम में एंट्री करने वाले दोनों गेट लावारिस हैं। दोनों गेटों पर ताला भी नहीं लगाया जाता है। चौकीदार की कोई व्यवस्था नहीं। आश्रम आने वाले लोगों का नाम दर्ज करने के लिए रजिस्टर भी नहीं है।
आश्रम का मुख्य गेट टूटा हुआ है। यहां पर ताला नहीं लग पाता। गेट क्रॉस करते ही आश्रम की सीमा शुरू हो जाती है। चहारदीवारी के नाम पर यहां कंटीले तार लगाए गए हैं, लेकिन ये जगह-जगह टूटे हुए हैं। आश्रम के दूसरे गेट की हालत भी खराब है। स्टाफ की कमी के चलते आश्रम से बाहर परिसर में कौन लड़की कब जा रही है और कौन कब अंदर आ रही, इस पर कोई निगरानी नहीं।
सरकार ने यहां एक अधीक्षक, दो आया, दो कुक और एक सफाई कर्मी तैनात किए हैं। दोनों कुक और सफाई कर्मी ड्यूटी के बाद चले जाते हैं। दिन और रात के समय एक-एक आया की ड्यूटी होती है। ऐसे में रात के समय सिर्फ एक अधीक्षक और एक आया आश्रम में मौजूद होते हैं।
