एफडीआई के विरोध में लामबंद हुई भाकपा

बिलासपुर। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी ने विभिन्न क्षेत्रों में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश का कड़ा विरोध करते हुए इसकी आलोचना की है। भाकपा ने लगातार बढ़ती महंगाई के साथ ही सरकारी नौकरियों के दरवाजे बंद करके निजी क्षेत्र को बढ़ावा देने की भी निंदा की है। सोमवार को भाकपा के एक प्रतिनिधिमंडल ने विभिन्न मुद्दों को लेकर उपायुक्त के माध्यम से प्रधानमंत्री को ज्ञापन भेजा।
भाकपा का कहना है कि केंद्र सरकार की गलत नीतियों के कारण देश की अर्थव्यवस्था डांवाडोल हो गई है। रुपया आज तक के न्यूनतम स्तर पर जा पहुंचा है। रुपये में गिरावट का सिलसिला अभी भी थमने का नाम नहीं ले रहा है। लाभ देने वाले कई उपक्रमों में 100 फीसदी प्रत्यक्ष विदेशी निवेश को अनुमति दी जा रही है। कई अन्य महत्वपूर्ण सेक्टरों में भी यही नीति लागू की जा रही है।
भाकपा के अनुसार पेट्रोल, डीजल व गैस समेत रोजमर्रा के प्रयोग की अन्य वस्तुओं के दाम लगातार बढ़ रहे हैं। तेल कंपनियों को लूट की खुली छूट दे दी गई है। इससे ऐसा लग रहा है कि सरकार का कंट्रोल कारपोरेट घरानों के सुपुर्द कर दिया गया है। आम जनता की कीमत पर औद्योगिक घराने चोखी कमाई कर रहे हैं। केंद्र व प्रदेश में सरकारी नौकरियों के दरवाजे बंद करके पढ़े लिखे युवाओं को निजी क्षेत्र में शोषण का शिकार होने पर मजबूर किया जा रहा है। भाकपा ने मांग की है कि उक्त मुद्दों पर गंभीरता से विचार विमर्श करके ठोस कदम उठाए जाएं। प्रतिनिधिमंडल में पूर्व विधायक केके कौशल, भाकपा के जिला सचिव रामलाल शर्मा, वासुदेव वसु, कुलदीप कश्यप, सीताराम शर्मा, एलआर धीमान, प्रवेश चंदेल, राकेश व रामपाल आदि शामिल थे।

Related posts