
कुल्लू। पल-पल बदलता मौसम का मिजाज किसानों और बागवानों पर भारी पड़ने लगा है। कुल्लू घाटी में सेब को काला सूरी ब्लॉच फ्लाई टैक और मार्सेनीना रोग ने जकड़ लिया है। सेब की फसल में मार्सेनीना रोग लगने के कारण समय से पूर्व ही पतझड़ भी शुरू हो गई है। यही नहीं सेब के पौधों के पत्ते भी पीले पड़ने लगे हैं।
बंपर फसल के चलते इस बार बागवानों को अच्छी कमाई की उम्मीद थी लेकिन फसल के रोग की चपेट में आने से वे चिंतित हैं। इन दिनों सेब में धब्बे न पड़े इसके लिए कैप्टॉन स्प्रे की जाती है लेकिन बागवानी विभाग के विक्रय केंद्रों में कैप्टॉन दवाई नहीं पहुंच पाई है। सेब सीजन शुरू हो चुका है। लगातार बारिश के कारण सेब में काले धब्बे भी पड़ना शुरू हो चुके हैं। इससे बागवान खासे परेशान हैं। सेब सीजन शुरू होने से 10-15 दिन पहले इस दवाई की स्प्रे की जाती है। इससे सेब पर सूरी ब्लॉच फ्लाई टैक बीमारी का प्रभाव नहीं पड़ता। बागवानों ने महकमे से इस दवाई का जल्द वितरण करने का आग्रह किया है।
बागवानी महकमे के नग्गर, जरी, बंजार, बाहू, मनाली और लगवैली विक्रय केंद्रों में अभी तक दवाई नहीं पहुंची है। बागवान कर्मचंद, प्यारे लाल, राजकुमार, भेद राम और किरण ने कहा कि बारिश से सेब पर काले धब्बे पड़ना शुरू हो गए हैं। पत्ते पीले होकर गिर रहे हैं। बागवानों का कहना है कि इससे वर्तमान फसल के साथ अगले साल होने वाली फसल को नुकसान पहुंच सकता है।
बागवानी विभाग के उपनिदेशक बीसी राणा ने बागवानों को सलाह दी है कि काला धब्बा रोग के लिए कैप्टॉन 600 एमएल और जीरम 600 एमएल 200 लीटर पानी में घोलकर इसका छिड़काव करें। कहा कि कैप्टॉन दवाई की डिमांड भेज दी है। जल्द ही इसकी आपूर्ति कर दी जाएगी।
