नहीं रुक रहे स्टंटबाजों के पुलिस पर हमले

नई दिल्ली। एमडीएलआर एयरलाइंस की पूर्व एयरहॉस्टेस ने अशोक विहार स्थित अपने निवास पर पांच अगस्त 2012 को सुसाइड किया था। उसने सुसाइड नोट में एमडीएलआर के मालिक व हरियाणा के पूर्व मंत्री गोपाल कांडा और उसकी सहयोगी अरुणा चड्ढा को खुदकुशी के लिए मजूबर करने का आरोप लगाया था। गोपाल कांडा और अरुणा चड्ढा तब से जेल में हैं। सोमवार को जिला न्यायाधीश एसके सरवरिया के समक्ष कांडा की जमानत याचिका पर सुनवाई होनी है। रीतिका (परिवर्तित नाम) एमडीएलआर एयरलाइंस में एयरहॉस्टेस रह चुकी थी। यह कंपनी हरियाणा के मंत्री गोपाल कांडा की थी। रीतिका ने सुसाइड नोट में लिखा था कि कांडा व चड्ढा की वजह से उसकी जिंदगी नरक बन गई है और वह अब जीना नहीं चाहती। वहीं, घटना के समय कांडा हरियाणा सरकार में गृह राज्यमंत्री थे। इस मामले में उसका नाम आने से दिल्ली व हरियाणा की राजनीति में काफी बवाल मचा था। निर्दलीय विधायक होने के बाद भी उसे हरियाणा सरकार में मंत्री पद मिला हुआ था। मामले के तूल पकड़ने पर उसको मंत्री पद से हाथ धोना पड़ा था।

दबोचने में नाकाम रही थी पुलिस
घटना के बाद दिल्ली पुलिस पर लगातार गोपाल कांडा को गिरफ्तार करने का दबाव बढ़ रहा था। पुलिस ने अरुणा चड्ढा को आठ अगस्त को पूछताछ के लिए बुलाया था, जिसके बाद उसे गिरफ्तार कर लिया गया। हालांकि, कांडा पुलिस की पकड़ में नहीं आ रहा था। आखिरकार कांडा ने 18 अगस्त को अशोक विहार थाने में समर्पण कर दिया था। मामले में कांडा और चड्ढा के खिलाफ आरोपों को साबित करने के लिए चनशिवरूप का बयान बेहद अहम है, लेकिन आठ माह से वह फरार है। चनशिवरूप पर आरोप है कि उसने फर्जी ई-मेल आईडी से रीतिका को मेल किए। उसने ई-मेल से रीतिका को उसके खिलाफ प्रत्यर्पण की कार्रवाई शुरू होने की जानकारी दी थी। उसी ने अमीरात एयरलाइंस अधिकारियों को रीतिका के सर्टिफिकेट फर्जी होने की बात कही, जिससे उस पर दबाव बने और वह वापस एमडीएलआर ज्वाइन कर ले।

देश छोड़कर भाग गया आरोपी
पुलिस ने मामले के करीब तीन माह बाद चनशिवरूप को गिरफ्तार किया था। उसने छह नवंबर को सरकारी गवाह बनने की पेशकश की। 27 नवंबर को उसका बयान दर्ज किया गया, जिसके बाद उसे जमानत मिल गई और वह देश छोड़कर भाग गया। पहले वह दुबई गया और फिर अमरीका चला गया।

अदालती कार्रवाई
पुलिस ने अक्टूबर में कांडा व चड्ढा के खिलाफ खुदकुशी के लिए उकसाने, धोखाधड़ी समेत कई धाराओं में आरोपपत्र दाखिल किया था। लंबी बहस के बाद जिला न्यायाधीश एसके सरवरिया ने मई में कांडा व चड्ढा के खिलाफ खुदकुशी के लिए उकसाने, धोखाधड़ी, फर्जी दस्तावेज बनाने व उनके इस्तेमाल और आईटी एक्ट की धाराओं में आरोप तय किए थे। अदालत ने कांडा पर दुष्कर्म व कुकर्म जबकि अरुणा चड्ढा पर इसके लिए उकसाने के आरोप भी तय किए थे। चड्ढा ने जिला अदालत के इस फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी, जिस पर सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने दुष्कर्म व कुकर्म के लिए उकसाने के आरोप हटा दिए हैं।

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