जान हथेली में रखकर पार करते हैं गधेरा

अल्मोड़ा। एक तरफ कई जगहों पर सूखे गधेरों में भी लाखों खर्च करके पुलिया बना दी जाती हैं दूसरी ओर ग्रामीणों की मांग के बावजूद बज्योली और पिठौनी गांवों को जोड़ने के लिए पुलिया नहीं बन सकी। पिठौनी के जूनियर और प्राथमिक स्कूल में पढ़ने वाले बज्योली गांव के बच्चों को प्रतिदिन बल्टा गधेरा पार कर पेटशाल स्थित स्कूलों में पहुंचना पड़ता है। यदि गधेरा पार करते वक्त अचानक गधेरे में पानी बढ़ गया तो बच्चों की जान को खतरा हो सकता है।
पेटशाल ग्राम पंचायत के बज्योली और पिठौनी में करीब 60 परिवार रहते हैं। बज्योली के बीच में बल्टा गधेरा है। गधेरे के दोनों तरफ ग्रामीणों की बसासत है। पेटशाल गांव की ओर रहने वाले परिवारों को आवागमन के लिए गधेरा पार नहीं करना पड़ता लेकिन दूसरी तरफ रहने वालों के लिए पेटशाल पहुंचने के लिए बल्टा गधेरा पार करना मजबूरी है। इस गांव को जोड़ने के लिए गधेरे में पुलिया का निर्माण नहीं हुआ है। पुलिया नहीं होने के कारण बच्चों के साथ ही ग्रामीणों को भी हर रोज गधेरा पार कर ही आवागमन करना पड़ता है। इससे लोगों को हमेशा जान का भय बना रहता है।
पेटशाल के प्रधान खजान पेटशाली ने बताया कि पुलिया बनाने के लिए कई बार बीडीसी बैठकों में प्रस्ताव रखे गए। प्रशासनिक अधिकारियों से भी गुहार लगाई लेकिन आज तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। प्रधान समेत दीपक सिराड़ी, जगदीश सिराड़ी, सुनील राम आदि ने बज्योली गांव के आवागमन को सुरक्षित करने के लिए बल्टा गधेरे में पुलिया निर्माण की मांग की है।

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