
हल्द्वानी। नेपाली माओवादी और आम चुनाव का विरोध करने वाले कुछ कट्टरपंथी संगठन भारत में हथियारों का जखीरा छिपाने की फिराक में हैं। उन्होंने उत्तराखंड, यूपी और बिहार से लगे बार्डर पर सक्रियता बढ़ा दी है। चुनाव की घोषणा के बाद नेपाल सरकार ने सभी वैध और अवैध हथियार सख्ती से जब्त करने शुरू कर दिए हैं। इसी के चलते ये संगठन हथियारों की बड़ी खेप बार्डर पर छिपाने के लिए भेजने लगे हैं। सूचना के बाद एसएसबी, आर्मी इंटेलिजेंस और स्थानीय इंटेलिजेंस एजेंसियाें ने बार्डर पर सक्रियता बढ़ा दी है। एक सप्ताह पूर्व पीलीभीत में हुई फ्रंट्रल मीटिंग में इसे रोकने पर चरचा की गई।
इसके अलावा इन एजेंसियों के लिए चिंता की बड़ी बात ये भी है कि नवंबर में होने वाले चुनाव के विरोध के लिए माओवादी संगठन बिहार और यूपी से बड़े पैमाने पर अवैध हथियार नेपाल ले जा सकते हैं। इस पर भी सभी एजेंसियों ने सक्रियता बढ़ा दी है। चुनाव की घोषणा होने के बाद मई से ही नेपाल सरकार ने वहां सभी तरह के वैध और अवैध हथियार जमा करने शुरू कर दिए हैं। माओवाद प्रभावित इलाकों में भी ज्यादा सख्ती की जा रही है, जिसके चलते माओवादियों और अन्य कट्टरपंथी संगठनों ने हथियार छिपाने शुरू कर दिए हैं, जिन्हें वे बार्डर एरिया और उससे जुड़ी भारतीय सीमाओं में छिपाने लगे हैं। 31 जुलाई को चुनाव का उग्र विरोध करने की एफडीएलएफ सहित कई संगठनों की घोषणा के बाद बार्डर पर सुरक्षा और खुफिया एजेंसियां पूरी तरह सक्रिय हो गई हैं। इन संगठनों ने आत्मघाती हमले या बूथ कैपचरिंग की धमकी तक चुनाव रोकने के लिए की है, जिसके लिए ये लोग यूपी और बिहार से अवैध हथियार भी बार्डर पार ले जा सकते हैं। पीलीभीत में हुए फ्रंट्रल बैठक में भारतीय एजेंसियों ने इन दोनों सूचनाओं पर गहनता से विचार कर योजना तैयार की है। उत्तराखंड पुलिस के एक बड़े पुलिस अधिकारी ने ये जानकारी देते हुए सक्रियता बढ़ाने की बात कही है।
