मिड-डे मील पर जवाब-तलब

चंडीगढ़: मिड-डे मील में गोलमाल को लेकर जवाब-तलब होने लगा है। प्रशासक के सलाहकार के.के.शर्मा ने फाइनांस डिपार्टमैंट को मिड-डे मील के खर्चों की समीक्षा करने के निर्देश दिए हैं। वहीं, एजुकेशन डिपार्टमैंट ने सिटको के मैनेजिंग डायरैक्टर को इस पूरे मामले की पड़ताल करने के बाबत पत्र भेजा है। साथ ही, इस मामले में सामने आने वाले तथ्यों से एजुकेशन डिपार्टमैंट को अवगत करवाने की बात भी कही है।

मिड-डे मील में गोलमाल का यह खुलासा हाल ही में ‘पंजाब केसरी’ ने किया था। इसमें सामने आया था कि स्कूली बच्चों को परोसा जाने वाले मिड-डे मील से प्रति माह लाखों रुपए की कमाई हो रही है। अकेले चंडीगढ़ इंडस्ट्रीयल एंड टूरिज्म डिवैल्पमैंट कार्पोरेशन (सिटको) ने ही पिछले कुछ सालों में करोड़ों रुपए प्रॉफिट को हजम कर लिया है।

मिड-डे मील से हो रही कमाई ने उन संस्थानों को भी कटघरे में खड़ा कर दिया था, जिन संस्थानों पर मौजूदा समय में मिड-डे मील बनाने की जिम्मेदारी है। शहर में मिड-डे मील का जिम्मा 4 संस्थानों के पास है। यह चारों संस्थान मिलकर करीब 60 हजार बच्चों का खाना तैयार करते हैं।

मिनिस्ट्री ऑफ ह्यूमन रिसोर्स डिवैल्पमैंट की तरफ से तय नियमों के तहत मिड-डे मील से कमाई करना पूरी तरह गलत है। बाकायदा मिनिस्ट्री में मिड-डे मील के डिप्टी सैक्रेटरी बी.डी.शिवानी ने इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा था कि मिड-डे मील स्कीम नो प्रॉफिट-नो लॉस की प्रणाली के तहत कार्य करती है। इसलिए मिड-डे मील से कोई भी संस्थान मुनाफा नहीं कमा सकता है। यह पूरी तरह गलत है। अगर चंडीगढ़ में ऐसा हो रहा है तो दस्तावेज खंगाले जाएंगे और कार्रवाई की जाएगी।

चंडीगढ़ प्रशासक सलाहकार के.के.शर्मा का कहना है फाइनांस डिपार्टमैंट को मिड-डे मील के खर्चों को रिव्यू करने के निर्देश दे दिए गए हैं। इसकी रिपोर्ट आने पर ही अगली कार्रवाई की जाएगी।

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