
नई दिल्ली। बटला हाउस एनकाउंटर मामले में अदालत ने आरोपी शहजाद अहमद को दोषी करार दिया है। वहीं दूसरी ओर अदालत ने अपने फैसले में पुलिस वालों के तौर तरीकों मसलन इंस्पेक्टर शर्मा के बगैर बुलेट प्रूफ जैकेट के फ्लैट में जाने और दो पुलिस वालों के पास हथियार नहीं होने पर सवाल उठाए हैं। अदालत ने कहा कि शायद दिल्ली पुलिस के जवानों ने जोश में होश खो दिया था।
अदालत ने पुलिस के इस रवैये पर हैरानी जताते हुए कहा कि क्या यह जोश में होश खोना है, गैर पेशेवर रवैया है या फिर दिल्ली पुलिस के पास हथियारों की कमी है। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश राजेंद्र कुमार शास्त्री ने अपने फैसले में कहा कि एनकाउंटर की कार्रवाई अचानक नहीं हुई थी। आतंकियों के छिपे होने की सूचना मिलने के बाद पुलिस ने एनकाउंटर के लिए बाकायदा टीम बनाई थी। इसके बावजूद इंस्पेक्टर मोहन चंद शर्मा ने कोई बुलेट प्रूफ जैकेट नहीं पहनी। टीम के दो सदस्यों के पास हथियार नहीं थे जबकि वह जानते थे कि उन पर गोली चल सकती है।
जानकारों की माने तो एनकाउंटर की कार्रवाई को बेहद लापरवाही से अंजाम दिया गया। इंस्पेक्टर मोहन चंद शर्मा ने अगर बुलेट प्रूफ जैकेट पहनी होती तो शायद वह बच जाते। हवलदार राजबीर को दो गोलियां लगीं लेकिन वह उसकी बुलेट प्रूफ जैकेट में फंसकर रह गईं जिससे उसकी जान बच गई।
एनकाउंटर के दौरान इंस्पेक्टर शर्मा को जो गोली लगी वह किसी हथियार से चली, यह आज तक राज बना हुआ है। बचाव पक्ष के अधिवक्ता सतीश टमटा ने अपनी बहस में कहा कि जो गोली मोहन चंद शर्मा के शरीर से मिली वह मौके से मिले हथियारों से मेल नहीं खाती।
