सबको था फैसले का इंतजार

नई दिल्ली। सबको बटला हाउस एनकाउंटर मामले में सुनाये जाने वाले फैसले का इंतजार था। बृहस्पतिवार को साकेत स्थित अदालत और बटला हाउस इलाके की एल-18 इमारत के आस-पास में पूरे दिन गहमागहमी कायम रही। दोनों ही जगहों पर भारी संख्या में लोगों की मौजूदगी दर्ज की गई। जिसे देखते हुए सुरक्षा के खास इंतजाम भी किए गए थे।
अदालत में सुनवाई के दौरान एएसजे राजेंद्र कुमार शास्त्री की अदालत लोगों से खचाखच भरी थी। फैसले के इंतजार में मीडियाकर्मी सुबह से कोर्ट परिसर में तैनात थे। फैसला सुनाने के लिए अदालत ने तीन बजे का समय दिया था। हालांकि अदालत में दो बजे ही भीड़ जमा होने लगी थी। सुरक्षा के नजरिए से दोपहर डेढ़ बजे कोर्ट की सघन तलाशी ली गई। तैनात पुलिसकर्मियों ने किसी भी बैग को अंदर ले जाने से रोक दिया। इसके फौरन बाद लोगों ने कोर्ट में अपनी-अपनी सीट पर कब्जा कर लिया। ढाई बजे तक कोर्ट रूम पूरी तरह भर गया था।
जज साहब के आने से कुछ समय पहले ही आरोपी शहजाद अहमद को कमांडो सुरक्षा में कोर्ट में लाया गया। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश राजेंद्र कुमार शास्त्री ठीक तीन बजे सीट पर आए और अपना फैसला सुनाया। जब एएसजे शास्त्री फैसला सुना रहे थे तो लोग बेहद सावधानी से फैसला सुन रहे थे। इस दौरान अदालत में स्पेशल सेल के एसीपी मनीषी चंद्रा, इंस्पेक्टर राहुल कुमार शर्मा व दूसरे कई पुलिसकर्मी मौजूद थे। जामिया टीचर सॉलीडेरिटी एसोसिएशन के पदाधिकारी व सदस्य भी मौजूद थे।
वहीं बटला हाउस इलाके में करीब-करीब पूरे दिन एल-18 के बाहर लोगों की भीड़ मौजूद रही। एनकाउंटर मामले पर कोर्ट का फैसला आते ही लोगों ने अपनी प्रतिक्रिया देनी शुरू कर दी। कोर्ट के आदेश का सम्मान करते हुए ज्यादातर लोगों ने पूरे मामले की न्यायिक जांच कराने की मांग की है। आज भी इलाके के कई लोग इस एनकाउंटर को सही मानने को तैयार नहीं है। वैसे कुछ लोगों में फैसले पर असहमति भी जताई। फैसला आने पर इलाके के ज्यादातर लोग खुलकर बोलने को तैयार नहीं थे।
जामिया मिल्लिया इस्लामिया से रिटायर प्रोफेसर मोहम्मद फिरोज आलम ने बताया ने कहा कि कुछ फिरकापरस्त ताकतें नहीं चाहती है कि देश में कौमी एकता बरकरार रहे। फिरोज आलम ने आरोप लगाया कि सरकार जानबूझकर एनकाउंटर मामले की न्यायिक जांच नहीं कराना चाहती है। वहीं एक अन्य शख्स ने एनकाउंटर को फर्जी बताते हुए कहा कि उन्हें यकीन है कि हाईकोर्ट में न्याय जरूर मिलेगा।

एल-18 में छाई रही खामोशी
जिस एल-18 बिल्डिंग की चौथी मंजिल पर एनकाउंटर हुआ था। उसकी दूसरी मंजिल पर रहने वाला युवक आज भी 19 सितंबर 2008 का दिन याद कर सहम उठता है। एनकाउंटर के दिन लगातार गोलियां चलने की आवाज आ रही थी। बिल्डिंग से पुलिस ने तुरंत लोगों को बाहर निकलने के लिए कह दिया था। नाम न छापने की शर्त पर युवक ने बताया कि एनकाउंटर के बाद ज्यादातर लोग बिल्डिंग को छोड़कर दूसरी जगहों पर चले गए । अब इस इमारत नये लोग रहते हैं। एनकाउंटर वाला फ्लैट आज भी बंद है। एल-18 के अन्य फ्लैटों में रह रहे लोगों ने अमर उजाला की टीम को देखकर अपना दरवाजा नहीं खोला।

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