चार साल में 11 भक्तों की मौतें

कुल्लू। ऐतिहासिक 18 हजार फुट ऊंची श्रीखंड यात्रा इस बार भी तीन जिंदगियों को लील गईं। 2010 से लेकर अब तक श्रीखंड यात्रा में 11 श्रद्धालुओं की मौत हो चुकी है। इसमें छह भक्तों की मौत आक्सीजन की कमी से हुई। कुछ की हार्ट अटैक और अन्य कारणों से मौतें हुई हैं।
यात्रा में सबसे अधिक शिमला जिला से ताल्लुक रखने वाले भक्तों ने प्राण छोड़े। दो बाहरी राज्यों से आए श्रद्धालु भी वापस अपने घर नहीं पहुंच सके। इस साल 13 जुलाई को शिमला जिला के ननखड़ी के एक युवक की मौत हो गई। 15 जुलाई को भाजपा नेता चेतन कुठियाला निवासी शिमला तथा 22 जुलाई को श्रीखंड के पास गुुजरात के 67 साल के श्रद्धालु निरंजन नर्मदा ने दम तोड़ दिया था। 2010 में निरमंड के सुनील कुमार, लखनऊ के अभिषेक कुमार की यात्रा के वक्त मौत हो गई थी। साल 2011 की श्री खंड यात्रा में शिमला जिला के कुमारसैन निवासी पीयूष मेहता, निरमंड के दोगरी की यमुना देवी (16) तथा शिमला के रहने वाले अतुल खन्ना और 2012 में सबसे पहले कुमारसैन के हरदेव कैंथला की मौत हुई है। जतोग कैंट शिमला निवासी देवेंद्र नाथ तथा मंडी जिला के सरकाघाट के प्रवीन कुमार को भी श्रीखंड यात्रा के वक्त अपनी जान गंवानी पड़ी। डीसी राकेश कंवर ने कहा कि ऐतिहासिक श्रीखंड यात्रा अधिकारिक रूप अब संपन्न हो चुकी है। यात्रा पर गया अंतिम जत्था वीरवार को श्रीखंड से वापस लौटते ही यहां तैनात पुलिस बल और चिकित्सा टीम सहित प्रशासन के प्रबंधों को हटा दिया जाएगा। अब जो भी व्यक्ति यात्रा पर जाएगा इसके लिए वह स्वयं जिम्मेदार होगा।

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