
नई दिल्ली। लो फ्लोर बसें दिल्ली ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन डिपो के गेट से तो ओके रिपोर्ट के साथ निकलती हैं, लेकिन बाहर जाकर बंद हो जाती हैं। राजधानी में आए दिन बीच सड़क पर लो फ्लोर बसों के ब्रेकडाउन का आंकड़ा तेजी से बढ़ रहा है। इससे यात्रियों को तो परेशानी होती ही है, साथ ही जाम भी लगता है।
यात्रियों को वर्ल्ड क्लास सुविधा देने का दावा करने वाले दिल्ली परिवहन विभाग की लो-फ्लोर बसें बीच सड़क पर फेल हो रही हैं। चार-पांच माह पहले डीटीसी बसों के ब्रेकडाउन का आंकड़ा औसतन डेढ़ सौ से पौने दो सौ तक था। अब चार सौ से ज्यादा बसें टो होकर डिपो पहुंचती हैं, जिसमें 99 फीसदी लो-फ्लोर होती हैं।
डीटीसी अधिकारियों के अनुसार, डिपो में सुबह ब्रेकडाउन व बस खराबी की शिकायतों को जांचने के बाद शेड्यूल तैयार होता है। वहीं, सूत्रों का कहना है कि खराब बसों को ओके रिपोर्ट में दिखाकर गेट से बाहर निकाल दिया जाता है क्योंकि ब्रेकडाउन होने पर कंपनी का पैसा नहीं कटता है।
सड़क पर डीटीसी बसों के बंद हो जाने के कारण ट्रैफिक जाम की समस्या लगातार बढ़ रही है। कई बार डीटीसी को लिखित में शिकायत संग सुझाव भी दिए गए, लेकिन समस्या दूर नहीं हुई।
अनिल शुक्ला, अतिरिक्त पुलिस आयुक्त, ट्रैफिक पुलिस
मेंटिनेंस की कमी के चलते ही लो फ्लोर बसें सड़कों पर खराब हो रही हैं। इसके लिए कंपनियों पर जुर्माना लगाया जा रहा है। साथ ही डिपो मैनेजरों को भी हिदायत दी गई है कि जिन बसों में तकनीकी खामी मिलती है, उन्हें सड़क पर न उतारा जाए।
