
चंबा। स्वास्थ्य विभाग की ओर से पीजी में चिकित्सकों के लिए कोटा घटाने का जिला मेडिकल आफिसर एसोसिएशन ने विरोध किया है। एसोसिएशन ने कोटा घटाने के स्वास्थ्य सचिव के निर्णय को चिकित्सक विरोधी बताया है। एसोसिएशन की स्थानीय इकाई के पदाधिकारियों ने बताया कि एमबीबीएस चिकित्सकों को एमडीएमएस करने के लिए 95 प्रतिशत का कोटा मिलता था। इसे घटाकर 67 प्रतिशत कर दिया गया है। इससे मेडिकल आफिसर एसोसिएशन काफी खफा है। पीजी में कोटा कम करने के निर्णय से जनजातीय क्षेत्रों के अस्पतालों में सेवाएं दे रहे चिकित्सक काफी हताश हैं। एसोसिएशन के पदाधिकारियों डा. विशाल ठाकुर, डा. दिलबाग और डा. संजय ठाकुर ने बताया कि जो कोटा सरकार और स्वास्थ्य विभाग ने निर्धारित किया था। इसका हार्ड एरिया में सेवाएं देने वाले चिकित्सकों को काफी फायदा मिलता था और दो साल बतौर एमबीबीएस सेवाएं देने के बाद एमडीएमएस करने के लिए मेडिकल कालेज टांडा और आईजीएमसी शिमला में सीट मिल जाती थी। कोटा 95 से 67 प्रतिशत करने का फैसला सही नहीं है। एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने बताया कि स्वास्थ्य सचिव के फैसले का स्टेट एसोसिएशन पहले भी विरोध दर्ज करवा चुकी है। जल्द सरकार और विभाग ने इस निर्णय पर पुनर्विचार नहीं किया तो एसोसिएशन कड़ा कदम उठाने पर मजबूर हो जाएगी। एसोसिएशन की स्थानीय इकाई ने स्वास्थ्य सचिव और मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह से से मांग की है कि चिकित्सकों की एमडीएमएस का कोटा 95 प्रतिशत ही रहने दिया जाए।
