
पपरोला (कांगड़ा)। कांगड़ा घाटी रेलमार्ग पर कोपरलाहड़ में भूस्खलन के चलते लगातार दूसरे दिन भी रेल सेवाएं बाधित रहीं। शनिवार को जोगिंद्रनगर से पठानकोट के लिए शाम 3 बजकर 55 मिनट पर चलने वाली रेलगाड़ी संख्या 52474/4 पीबीजे रद कर दी गई। जबकि पठानकोट से बैजनाथ-पपरोला आने वाली गाड़ी संख्या 52463 रद की गई। अन्य रेलगाड़ियां कोपरलाहड़ तक ही रवाना हुईं।
रेल विभाग से मिली जानकारी के अनुसार कोपरलाहड़ में भारी बारिश के चलते करीब 34 मीटर लंबे ट्रैक के नीचे मिट्टी करीब ढाई फुट तक धंस गई है। रेल विभाग ने बीते दिनों उक्त स्थान पर ट्रैक के नीचे डंगा लगाया था जो मूसलाधार बारिश से ध्वस्त हो गया है। वरिष्ठ सेक्शन इंजीनियर (रेल पथ) कुलदीप सिंह ने बताया कि भारी बारिश के चलते रेलमार्ग को बहाल करने में वक्त लग सकता है।
रेल विभाग रो रहा बजट का रोना
कोपरलाहड़ व ज्वालामुखी रोड के बीच हर साल भूस्खलन से रेलमार्ग बंद होने से कांगड़ा घाटी रेल थम जाती है, जिसका खामियाजा हजारों यात्री भुगतते हैं। लेकिन रेल विभाग आज तक समस्या का स्थायी हल नहीं निकाल सका है। कोपरलाहड़ के पास रेल मार्ग के साथ लगती ढलान की मिट्टी चिकनी होने के चलते भारी बरसात होने पर सीधे ट्रैक पर धंस जाती है। रेल विभाग ने बीते साल भूस्खलन प्रभावित सेक्शन में ट्रैक के किनारे डंगा भी लगाया जो भारी बारिश की मार न झेलते हुए जगह-जगह से टूट गया है। वरिष्ठ सेक्शन इंजीनियर (रेल पथ) कुलदीप सिंह ने कहा कि उक्त स्थान की भौगोलिक स्थिति भी इसके लिए जिम्मेदार है। साथ ही एनएच-88 को चौड़ा करने का काम चलने के कारण सड़क पर बहता पानी भी सीधे ट्रैक पर गिरता है। उन्होंने माना कि नैरोगेज लाइन के लिए कम बजट होने के कारण भू-स्खलन का आज तक स्थायी हल नहीं निकाला जा सका है। उच्चाधिकारी ही इस बाबत कोई फैसला ले सकते हैं।
