
कर्णप्रयाग। आपदा ने जनपद की सूरत ही बिगाड़ दी है। आपदा से थराली और जोशीमठ तहसील क्षेत्र सबसे अधिक प्रभावित हुए हैं। यहां 84 गांवों में भारी नुकसान हुआ है, जिनमें 12 गांव सबसे अधिक संवेदनशील हैं।
पिछले 17 जून को आई आपदा से जनपद की स्थिति भयावह हो गई है। जोशीमठ क्षेत्र के 25 गांवों की 2331 परिवार प्रभावित हो चुके हैं। लामबगड़, पांडुकेश्वर, पुलना, भ्यूंडार, हनुमान चट्टी और खीरयूं गांव के अस्तित्व पर ही खतरा आ गया है। थराली तहसील के 59 गांवों का भी यही हाल है। नारायणबगड़ ग्राम पंचायत के अंतर्गत जहां पुराना बाजार अतीत का हिस्सा बन चुका है। वहीं थराली में मस्जिद मार्केट और मुस्लिम बस्ती और नासीर बाजार खत्म होने की कगार पर पहुंच गए हैं। तहसील के इन प्रभावित गांवों में निवास करने वाले 6157 परिवार दिन हो चाहे रात डर के साए में जी रहे हैं। चेपड़ों, नारायणबगड़, केवर तल्ला, भ्याड़ी, थराली और देवराड़ा गांव के निकट भू-धंसाव हो रहा है। जिला आपदा प्रबंधन विभाग के अनुसार आपदा से अभी तक जनपद में प्रभावित हुए 84 गांवों में 12 गांवों की स्थिति सबसे बुरी है। इन गांवों को विस्थापन की सूची में शामिल करने की कार्रवाई की जा रही है। विदित हो कि बीते वर्ष 2011 में आई आपदा में जनपद में प्रभावित 410 गांवों में सर्वाधिक थराली तहसील के 105 गांव शामिल थे, लेकिन इन गांवों की सुध नहीं ली गई।
विस्थापन की कार्रवाई भी ठंडे बस्ते में
जनपद में पिछले कई वर्षों से आपदा से प्रभावित गांवों की संख्या बढ़ रही है। जनपद में जोशीमठ तहसील के 29 गांवों सहित 74 गांवों का अन्यत्र विस्थापन होना है, लेकिन मामला फाइलों में दम तोड़ रहा है। ग्रामीण डर के साए में जी रहे हैं। लेकिन प्रशासनिक और विभागीय अधिकारी कभी शासन में मामला लंबित होने तो कभी भू-गर्भीय सर्वेक्षण की बात कहर पल्ला झाड़ने में लगे हैं।
अभी तक मिली रिपोर्ट में 84 गांव प्रभावित हुए हैं, जिसमें थराली में 59 और जोशीमठ में 25 गांव शामिल हैं। गांवों की स्थिति पर नजर रखी जा रही है। कुछ अति प्रभावित गांवों को विस्थापन सूची में शामिल करने के लिए भी कार्रवाई की जा रही है। जिन गांवों का विस्थापन होना है, वह शासन से होना है।
– एनके जोशी, जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी चमोली (गोपेश्वर)
